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पुलिस ने 35 साल पुराने हत्या के मामले को सुलझाया, आरोपित लुधियाना से गिरफ्तार

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पुलिस ने 35 साल पुराने हत्या के मामले को सुलझाया, आरोपित लुधियाना से गिरफ्तार


नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 35 साल पुराने हत्या मामले का पर्दाफाश करते हुए 1991 से फरार चल रहे आरोपित को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल (आईएससी) की टीम ने लंबे समय तक तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला वर्ष 1991 का है, जब त्रिलोकपुरी थाना क्षेत्र के वेस्ट विनोद नगर इलाके में दो अगस्त को एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई थी। उस समय पुलिस को एक पीसीआर कॉल के जरिए सूचना मिली थी कि एक महिला पर चाकू से हमला किया गया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने करीब 55 वर्षीय महिला को गंभीर हालत में पाया, जिसके गले पर कई वार किए गए थे। वहीं उसका 18-20 वर्षीय बेटा भी चेहरे पर चाकू के घाव के साथ घायल मिला। दोनों घायलों को तत्काल लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। जबकि उसका बेटा बच गया। इस मामले में हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार जांच में सामने आया कि आरोपित छवि लाल वर्मा, जो पीड़िता के घर में किरायेदार था ने ही इस वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद वह फरार हो गया और 10 मई 1996 को उसे कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस उपायुक्त के अनुसार हाल ही में क्राइम ब्रांच की आईएससी टीम को इस पुराने मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई। इंस्पेक्टर मनमीत मलिक के नेतृत्व में टीम ने पिछले छह महीनों तक लगातार काम किया। इस दौरान आरोपित के पैतृक गांव सुल्तानपुर सहित कई संभावित ठिकानों पर छानबीन की गई। तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपित की लोकेशन लुधियाना में मिलने की सूचना मिली। इसके बाद 10 अप्रैल को पुलिस टीम ने वहां छापा मारकर आरोपित को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपित ने खुलासा किया कि उसे शक था कि मकान मालकिन के पास काफी पैसे हैं, क्योंकि उसका पति विदेश में रहता था। इसी लालच में उसने रात के समय घर में घुसकर लूटपाट की कोशिश की। विरोध करने पर उसने महिला और उसके बेटे पर धारदार हथियार (चॉपर) से हमला कर दिया।

वारदात के बाद आरोपित 35 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा और कोलकाता, मुंबई, नागपुर, गोवा और पंजाब जैसे शहरों में लगातार ठिकाने बदलता रहा। गिरफ्तारी के डर से वह अपने गांव भी नहीं गया और यहां तक कि अपने बच्चों की शादियों में भी शामिल नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, आरोपित फिलहाल लुधियाना में एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे संबंधित थाना त्रिलोकपुरी को सौंप दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी