15 साल से लग्जरी कारों की चोरी का नेटवर्क, म्यांमार सीमा तक पहुंचा सिंडिकेट, तीन गिरफ्तार
नई दिल्ली, 17 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चोरी कर देश के अलग-अलग राज्यों में खपाने वाले संगठित गिरोह का क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे और निशानदेही पर पांच चोरी की कारें, डुप्लीकेट चाबियां, 104 फर्जी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) और 24 फर्जी आरसी बरामद हुई हैं। गिरोह का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर से लेकर राजस्थान, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और मणिपुर तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार सीमा के पास से बरामद दो चोरी की कारों को भूमिगत संगठनों को बेचने की तैयारी थी।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रोहिणी निवासी अमित नगर उर्फ सोनू, मणिपुर के इंफाल ईस्ट निवासी एटम जगत सिंह और मुकेश सिंह के रूप में हुई है। अमित नगर के खिलाफ वाहन चोरी और आर्म्स एक्ट समेत 38 मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब 15 साल पहले लग्जरी कारों की चोरी शुरू की थी। जेल में रहने के दौरान उसकी पहचान कई वाहन चोरों और रिसीवरों से हुई और धीरे-धीरे उसने चोरी की कारों की सप्लाई और बिक्री का बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि अमित ने पूछताछ में दावा किया है कि वह अब तक अलग-अलग राज्यों में 100 से ज्यादा चोरी की महंगी कारें रिसीवरों तक पहुंचा चुका है। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कंप्यूटर आधारित स्कैनिंग डिवाइस की मदद से कारों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल (ईसीएम) को बाईपास करते थे। इसके बाद डुप्लीकेट चाबी तैयार कर कार लेकर फरार हो जाते थे। मुख्य रूप से महंगी कारों और एसयूवी को निशाना बनाया जाता था। चोरी के बाद कारें अमित नगर तक पहुंचाई जाती थीं। इसके बाद वह अपने नेटवर्क के जरिए इन्हें दूसरे राज्यों में भेजता था। चोरी की कारों की पहचान बदलने के लिए फर्जी नंबर प्लेट और आरसी का इंतजाम भी इसी नेटवर्क से किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, मुकेश सिंह और एटम जगत सिंह चोरी की कारें अमित से खरीदकर मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में बेचते थे। एटम ने पूछताछ में बताया कि वह अमित से एक कार करीब 1.5 से दो लाख रुपये में खरीदता था और आगे करीब 40 से 50 हजार रुपये का मुनाफा लेकर बेच देता था। वह अमित और मणिपुर के रिसीवरों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाता था। आरोपितों के अनुसार, अमित सीधे दूसरे सदस्यों से मिलने से बचता था और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप के जरिये संपर्क करता था। चोरी की कारें दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर रात के समय पहुंचाई जाती थीं।
क्राइम ब्रांच ने 12 मई को छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 में छापेमारी कर मुकेश सिंह को पकड़ा था। उसके पास दो फर्जी आरसी मिलीं। उसके किराये के मकान की तलाशी में नंबर प्लेट लगाने वाला उपकरण, रिवेट का पैकेट, 104 फर्जी एचएसआरपी और 22 फर्जी आरसी बरामद हुईं। उसकी निशानदेही पर वजीराबाद गांव से ग्रे रंग की मारुति बलेनो बरामद हुई। उसके बाद मुकेश की निशानदेही पर मजनूं का टीला से एटम जगत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से तीन मोबाइल फोन, फर्जी आरसी और प्री-एक्टिवेटेड सिम बरामद हुआ। उसकी निशानदेही पर मुकर्जी नगर से चोरी की मारुति स्विफ्ट बरामद की गई। इसके बाद अमित नगर को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर चोरी की मारुति स्विफ्ट डिजायर बरामद हुई। जांच में उसके संगठित नेटवर्क और लगातार अपराध में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले में एमसीओसी एक्ट की धारा 3 जोड़ी गई।
जांच का सबसे अहम सुराग 13 अगस्त को मिला। एटम जगत सिंह की निशानदेही पर मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से किआ सेल्टोस और हुंडई क्रेटा बरामद की गईं। जांच में दोनों कारें दिल्ली के रंजीत नगर और अशोक विहार थानों में दर्ज वाहन चोरी के मामलों में वांछित मिलीं। पुलिस के अनुसार, इन कारों को सीमावर्ती इलाके में आगे खपाने के लिए ले जाया गया था और भूमिगत समूहों को बेचने की तैयारी थी। सीमा क्षेत्र से बरामदगी ने गिरोह के अंतरराज्यीय और संभावित सीमा-पार नेटवर्क की ओर भी जांच का रुख किया है।
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला है कि गिरोह में अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ वाहन चोरी करते थे, कुछ चोरी की कारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे, जबकि अन्य फर्जी नंबर प्लेट और आरसी तैयार कराने तथा कारों को बेचने का काम करते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह के संपर्क राजस्थान, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और मणिपुर तक थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। साथ ही आरोपितों द्वारा चोरी की गई 100 से अधिक कारों का पता लगाने, उनके खरीदारों और रिसीवरों की पहचान करने तथा चोरी के वाहनों की पूरी सप्लाई चेन खंगालने की कार्रवाई जारी है।
पुलिस के अनुसार आरोपितों से पांच चोरी की कारें, डुप्लीकेट चाबियां, 104 फर्जी एचएसआरपी, 24 फर्जी आरसी, मोबाइल फोन और प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद कारों से भजनपुरा, प्रशांत विहार, पश्चिम विहार ईस्ट, रंजीत नगर और अशोक विहार थानों में दर्ज पांच वाहन चोरी के मामले सुलझाए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

