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फर्जी रजिस्ट्रेशन कर बेच डालीं 1000 से ज्यादा चोरी की गाड़ियां, आरोपित गिरफ्तार

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फर्जी रजिस्ट्रेशन कर बेच डालीं 1000 से ज्यादा चोरी की गाड़ियां, आरोपित गिरफ्तार


नई दिल्ली, 02 मई (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चोरी की लग्जरी गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन कर उन्हें बाजार में बेचने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 31 हाई-एंड वाहन बरामद हुए हैं, जिनके चेसिस नंबर से छेड़छाड़ की गई थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह अब तक 1000 से अधिक चोरी और लोन डिफॉल्ट वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वैध दिखाकर बेच चुका है।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गाैतम ने शनिवार को बताया कि गिरोह चोरी और लोन डिफॉल्ट वाहनों को खरीदने के बाद उनके चेसिस नंबर बदल देता था। इसके बाद फर्जी फॉर्म-21, बैंक एनओसी और अन्य दस्तावेज तैयार कराकर परिवहन विभाग में उनका दोबारा पंजीकरण कराया जाता था। बाद में इन्हें असली कागजात वाली गाड़ी बताकर बाजार में बेच दिया जाता था। पुलिस उपायुक्त के अनुसार मामले का खुलासा पीतमपुरा से अगस्त 2025 में चोरी हुई एक हुंडई क्रेटा की जांच के दौरान हुआ। वाहन चोरी की शिकायत मौर्य एन्क्लेव थाने में दर्ज कराई गई थी। बाद में जांच इंटर स्टेट सेल, क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। तकनीकी और जमीनी जांच में सामने आया कि एक बड़ा गिरोह सुनियोजित तरीके से वाहन चोरी, चेसिस नंबर बदलने और फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने का काम कर रहा है।

पांच राज्यों में फैला था नेटवर्क

क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उप्र और हिमाचल प्रदेश में छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और हर सदस्य की अलग भूमिका तय थी। कोई चोरी की गाड़ियां उपलब्ध कराता था, कोई चेसिस नंबर बदलता था, कोई फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और कुछ लोग परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराते थे।

ट्रांसपोर्ट विभाग के कर्मचारी भी जांच के घेरे में

जांच में सामने आया कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित आरएलए कार्यालय का एक क्लर्क भी गिरोह के संपर्क में था। आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 350 से अधिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन में मदद की। पुलिस परिवहन विभाग के अन्य कर्मचारियों और एजेंटों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जालंधर का कार डीलर निकला मास्टरमाइंड

गिरफ्तार मुख्य आरोपित दमनदीप सिंह उर्फ लकी जालंधर में सेकेंड हैंड कार डीलरशिप चलाता है। पुलिस के अनुसार वही पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। चोरी के वाहन खरीदने से लेकर चेसिस बदलवाने, फर्जी कागजात बनवाने, रजिस्ट्रेशन कराने और बिक्री तक की पूरी व्यवस्था उसी के इशारे पर होती थी।पुलिस ने उसके साथ अरविंद शर्मा को गिरफ्तार किया, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर पंजीकरण फाइलें लगवाता था। अमनदीप को बतौर बिचौलिया और फील्ड ऑपरेटिव पकड़ा गया। इसके बाद जांच में सुभाष चंद, जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित आरएलए कार्यालय में क्लर्क है, को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने 350 से अधिक फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने में मदद की। पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए चोरी की गाड़ियां उपलब्ध कराने वाले मनबीर सिंह उर्फ मिंटा, हेमराज सिंह उर्फ हेमा, कंवलजीत उर्फ जॉली और बृज मोहन कपूर उर्फ बॉबी को गिरफ्तार किया। वहींचेसिस नंबर बदलने वाले मैकेनिक परदीप सिंह उर्फ हीरा को भी गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित तौर पर कई गाड़ियों के नंबर बदलकर नई पहचान दी। इसके अलावा गिरोह से जुड़े टिफल नौखेज को भी दबोचा गया, जो इन फर्जी वाहनों का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी में करता था।ऐसे करता था गिरोह कामगिरोह पहले चोरी या लोन डिफॉल्ट वाहन हासिल करता था। फिर तकनीकी विशेषज्ञ चेसिस और इंजन नंबर बदलते थे। इसके बाद फर्जी फॉर्म-21, बैंक एनओसी, आरसी और अन्य दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। परिवहन विभाग में सांठगांठ के जरिए एक पोर्टल पर एंट्री कराकर वाहनों का नया पंजीकरण कराया जाता था। बाद में इन्हें वैध सेकेंड हैंड वाहन बताकर बाजार में बेच दिया जाता था।पुलिस ने इनसे 11 टोयोटा फॉर्च्यूनर, तीन टोयोटा इनोवा, छह किआ सेल्टोस, छह हुंडई क्रेटा, एक हुंडई वेन्यू, एक महिंद्रा थार, 2 महिंद्रा स्कॉर्पियो-एनऔर एक स्विफ्ट डिजायर बरामद की।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी