home page

(अपडेट) मूसेवाला हत्याकांड में गैंगस्टर बिश्नोई को हथियार सप्लाई करने वाले दस तस्कर गिरफ्तार

 | 
(अपडेट) मूसेवाला हत्याकांड में गैंगस्टर बिश्नोई को हथियार सप्लाई करने वाले दस तस्कर गिरफ्तार


नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट ने सिंगर मूसेवाला हत्याकांड में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग को हथियार तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम ने इस मामले में दस हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राहिल (37), हासिम (45), सईम (24), सोनू (31), घनश्याम शर्मा उर्फ घनी (26), वसीम मलिक समेत दस लोगों के रूप में हुई है। आरोपितों के कब्जे से एक सब-मशीन गन (स्कॉर्पियन), 20 विदेशी पिस्टल, करीब 200 जिंदा कारतूस, 10 मोबाइल फोन, एक बाइक और एक स्कूटी बरामद की गई है। बरामद हथियार इटली, जर्मनी, तुर्की, ब्राजील और चेक रिपब्लिक में बने बताए जा रहे हैं। डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि आरोपितों को एसीपी संजय नागपाल की देखरेख में इंस्पेक्टर मान सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम के नेतृत्व वाली टीम ने गिरफ्तार किया है।

नेपाल से भारत में अवैध हथियार सप्लाई

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, नेपाल से भारत में अवैध हथियार सप्लाई होती थी। इसके साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा हुआ अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क था, जो विदेशी पिस्टल और ऑटोमैटिक हथियार भारत में तस्करी कर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के गैंगस्टरों और शूटरों को सप्लाई करता था। इस गिरोह का मुख्य सरगना शाहबाज अंसारी बताया जा रहा है, जो फिलहाल भारत से फरार है और विदेश से इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि पाकिस्तान से हथियार पहले मिडिल ईस्ट देशों में भेजे जाते थे, वहां से पार्ट्स के रूप में नेपाल पहुंचाए जाते थे। नेपाल में हथियारों को दोबारा असेंबल किया जाता था और फिर भारत-नेपाल सीमा के रास्ते तस्करी कर भारत लाया जाता था। इसके बाद दिल्ली, एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग सप्लायर्स के जरिए गैंगस्टरों तक हथियार पहुंचाए जाते थे।

दरियागंज में छापामार कर तीन दबोचे

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने 13 मार्च को दरियागंज इलाके में जाल बिछाकर तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से पिस्टल और कारतूस बरामद हुए थे। पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर कुल 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में इस्तेमाल हथियारों की सप्लाई से भी जुड़े हुए हैं और लॉरेंस बिश्नोई गैंग को भी हथियार सप्लाई किए जाते थे। पुलिस अब फरार मुख्य सरगना और विदेश में बैठे हैंडलर्स की तलाश में जुटी है।

हर ऑपरेशन के बाद मोबाइल तोड़ देते थे

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार हथियार तस्कर बेहद शातिर तरीके से अपना नेटवर्क चला रहे थे। आरोपी पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद और आसपास के भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहते थे और संकरी गलियों का फायदा उठाकर हथियारों को छिपाने और ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल करते थे। आरोपी आपस में संपर्क के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और वीओआईपी कॉल का इस्तेमाल करते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हर ऑपरेशन और हथियार डील के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड को तोड़कर नष्ट कर देते थे, ताकि पुलिस उनके नेटवर्क तक न पहुंच सके। हथियारों की सप्लाई के बदले पेमेंट हवाला के जरिए की जाती थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क पिछले सात-आठ महीनों से सक्रिय था और दिल्ली-एनसीआर के अपराधियों को विदेशी हथियार उपलब्ध करा रहा था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी