रायपुर : एम्स का डॉक्टर बनकर करोड़ों की ठगी की साजिश रचने वाला शातिर ठग गिरफ्तार
रायपुर, 11 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी रायपुर में पुलिस ने आज एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को एम्स का डॉक्टर बताकर करोड़ों की ठगी की साजिश रच रहा था। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड, सिम कार्ड, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, पासपोर्ट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र शामिल हैं। साथ ही प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम पर बनाए गए फर्जी पहचान पत्र भी बरामद किए गए हैं।पूछताछ में यह भी सामने आया कि, आरोपित पहले भी ओडिशा में कई मामलों में जेल जा चुका है और रिहा होने के बाद रायपुर में नई पहचान के साथ ठगी की योजना बना रहा था।
आरोपित लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे लोगों और बैंकों को निशाना बना रहा था। पुलिस की सक्रियता से एक बड़ा आर्थिक अपराध होने से पहले ही टल गया, थाना कबीर नगर पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए ओडिशा के कटक निवासी आदतन अपराधी श्रीधर राउत को रायपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपित पिछले करीब 7 महीनों से अविनाश आशियाना कॉलोनी में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था।
जांच में सामने आया कि, आरोपी खुद को एम्स का डॉक्टर बताकर बैंक अधिकारियों और आम लोगों का विश्वास जीत रहा था। उसकी योजना फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये के लोन लेने और रकम लेकर फरार होने की थी।आरोपित लग्जरी वाहन और जमीन खरीदने के नाम पर भी बैंक से लोन लेने की तैयारी में था। इसके अलावा वह आसपास के लोगों से भी फर्जी पद और पहचान बताकर पैसे ठगने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई प्रोएक्टिव पुलिसिंग का उदाहरण है, जहां किसी शिकायत से पहले ही बड़े अपराध को रोक लिया गया। पुलिस ने आम नागरिकों और बैंक अधिकारियों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान की पूरी तरह पुष्टि किए बिना कोई वित्तीय लेन-देन न करें। किराएदार अथवा घरेलू कामगार रखने से पूर्व पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कराएं।
पुलिस ने बताया कि, कबीर नगर पुलिस ने तब कार्यवाही की जब कोई ठगी अभी हुई नहीं थी कोई पीड़ित सामने नहीं आया था, कोई बैंक शिकायत नहीं थी। पुलिस ने स्वयं की सूचना तंत्र, स्थानीय निगरानी एवं सतर्क अन्वेषण के बल पर षड्यंत्र को उसके निर्माण के दौरान ही पहचाना और समय रहते हस्तक्षेप किया। इस एक गिरफ्तारी ने न केवल रायपुर के बैंकों को करोड़ों रुपये की संभावित क्षति से बचाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि फर्जी पहचान के सहारे कोई भी कितने ही समय तक नहीं छिप सकता।
श्रीधर राउत कोई नया या अज्ञात अपराधी नहीं है। वह एक कुख्यात आदतन अपराधी है जो पूर्व में ओडिशा के बैंकों को कार लोन एवं होम लोन के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी कर जेल जा चुका है। कटक के थाना सदर में 2015-24 तक धारा 380,457, और 2018 में धारा 294, 323, 341, 354, 506, 34 IPC धारा 294, 323, 341, 354, 506, 509 IPC सहित कई अन्य मामले दर्ज हैं। जेल से रिहा होने के पश्चात आरोपित ओडिशा से रायपुर आकर छिप गया था और यहाँ भी उसी आपराधिक पैटर्न पर बड़ी ठगी की तैयारी में था। यह प्रकरण इस बात का प्रमाण है कि आदतन अपराधी अपना राज्य बदल सकते हैं किंतु अपना तरीका नहीं। गिरफ्तारी के दौरान उससे भारी मात्रा में जाली एवं कूटरचित दस्तावेज बरामद किए गए, जो उसकी सुनियोजित एवं पूर्वनियोजित आपराधिक मंशा को स्पष्ट करते हैं। इनमें कूटरचित आधार कार्ड एवं पैन कार्ड
3 अन्य व्यक्तियों के नाम पर जारी पासपोर्ट, जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र एवं डिग्री दस्तावेज सरकारी एवं प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के जाली पहचान पत्र जिनमें एम्स जैसी संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग शामिल हैं। इस प्रकार के दस्तावेजों की संख्या एवं विविधता यह स्पष्ट करती है कि आरोपित ने यह धोखाधड़ी की तैयारी पूर्व-नियोजित तरीके से और लंबे समय से की थी। यह एकल अपराधी नहीं बल्कि एक सुविचारित ठगी तंत्र चलाने वाला व्यक्ति है। फिलहाल आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर

