साइबर ठगी के 4.09 करोड़ रुपये के खेल में एक और गिरफ्तारी, गोविंद वर्मा पकड़ा गया
गोरखपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। साइबर अपराध और इन्वेस्टमेंट व ट्रेडिंग फ्रॉड से प्राप्त धनराशि को म्यूल बैंक खातों के जरिए निकालकर क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलने वाले गिरोह के खिलाफ गोरखपुर पुलिस को एक और सफलता मिली है। चिलुआताल पुलिस ने मामले में वांछित आरोपी गोविंद वर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से 2.51 लाख रुपये नकद, दो लैपटॉप, एक मोबाइल फोन और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह से जुड़े 34 म्यूल बैंक खातों के संबंध में देश के 14 राज्यों से कुल 4,09,11,738 रुपये की साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक उत्तरी के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष चिलुआताल सूरज सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान गोविंद वर्मा पुत्र स्वर्गीय अच्छेलाल वर्मा, निवासी असवनपार, थाना गगहा, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है।
20 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे बैंक खाते
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संगठित गिरोह साइबर फ्रॉड और इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग के नाम पर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों में मंगवाता था। इसके लिए लोगों को उनके बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 20 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता था। लालच में आकर कुछ लोग अपने बैंक खाते खुलवाकर उनकी पासबुक, एटीएम कार्ड और चेक गिरोह के सदस्यों को उपलब्ध करा देते थे।
इन खातों में ठगी की रकम जमा होने के बाद एटीएम और चेक के माध्यम से नकदी निकाली जाती थी। इसके बाद निर्धारित कमीशन काटकर शेष रकम को विदेशी एजेंटों की मदद से USDT यानी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जाता था। फिर इस डिजिटल मुद्रा को निर्धारित विदेशी वॉलेट एड्रेस पर भेज दिया जाता था। इस तरीके से ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे हस्तांतरित किया जाता था।
14 राज्यों से जुड़ी हैं ठगी की शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में कुल 34 म्यूल बैंक खातों से संबंधित 4 करोड़ 9 लाख 11 हजार 738 रुपये की साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। ये शिकायतें बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से संबंधित हैं।
पुलिस अब इन बैंक खातों में धनराशि के वास्तविक स्रोत, खाताधारकों की भूमिका और गिरोह के अन्य सदस्यों के संबंध में जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ठगी की रकम किन खातों से होकर गुजरी और उसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किन विदेशी वॉलेट तक पहुंचाया गया।
पूछताछ में मकसूद आलम खां का नाम आया सामने
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान गोविंद वर्मा ने बताया कि वह मकसूद आलम खां के लिए काम करता था। उसका काम लैपटॉप और मोबाइल की मदद से साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को USDT में परिवर्तित कर विदेशी वॉलेट में भेजना था। पुलिस इस भूमिका और पूछताछ में सामने आए तथ्यों की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि पुलिस के प्रेस नोट के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। अब गोविंद वर्मा की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के नेटवर्क, बैंक खातों और विदेशी एजेंटों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
आईटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा
इस मामले में थाना चिलुआताल में मुकदमा अपराध संख्या 792/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 317(5), 338 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66C और 66D के अंतर्गत अभियोग दर्ज है। पुलिस आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई कर रही है।
इन पुलिसकर्मियों ने की कार्रवाई
कार्रवाई करने वाली टीम में निरीक्षक फिरोज अहमद खान, थानाध्यक्ष चिलुआताल उपनिरीक्षक सूरज सिंह, साइबर प्रभारी उपनिरीक्षक सच्चिदानंद पांडेय, कांस्टेबल पंकज कुमार पांडेय और कांस्टेबल सूर्यांश सिंह शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों, संदिग्ध बैंक खातों और ठगी की रकम के लेनदेन की जांच जारी है।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

