अंबिकापुर : रकम दुगुनी करने का झांसा देकर 9.26 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले चिटफंड कंपनी के दो पदाधिकारी गिरफ्तार
अंबिकापुर, 28 मई (हि.स.)। सरगुजा जिले में इनामी चिटफण्ड और धन परिचालन स्कीम के जरिए आम जनता से करोड़ों रुपये की जालसाजी करने वाले दो मुख्य आरोपितों को गांधीनगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल दिशा-निर्देशन में चलाए जा रहे धरपकड़ अभियान के तहत यह सख्त कार्रवाई की गई है।
पकड़े गए शातिर आरोपितों ने एक फर्जी कंपनी के माध्यम से भोले-भाले ग्रामीण और जनजातीय लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये का गबन किया था, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में आज जेल भेज दिया है।
इस संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब ग्राम मैनपाट (थाना कमलेश्वरपुर) निवासी प्रार्थी देवराज यादव ने गांधीनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 'वेलफेयर बिल्डिंग एण्ड ईस्टेट प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी' के डायरेक्टरों, एडवाइजरी हेड बलराम पाठक और जोनल मैनेजर अखिलेश प्रजापति सहित अन्य पदाधिकारियों ने नमनाकला में अपना भव्य कार्यालय खोला था। इन ठगों ने स्थानीय स्तर पर एजेंटों का एक जाल (चैन सिस्टम) तैयार किया और उन्हें भारी कमीशन का लालच देकर क्षेत्र के सीधे-साधे, अशिक्षित और जनजातीय वर्ग के लोगों को कम समय में रकम दुगुनी करने का प्रलोभन दिया। बिना किसी सक्षम प्राधिकारी या रिजर्व बैंक की अनुमति के, अवैध रूप से धन परिचालन की इस स्कीम में लोगों ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगा दी, जिसके बाद आरोपी कार्यालय बंद कर फरार हो गए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांधीनगर पुलिस ने गहन विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने प्रार्थी, गवाहों और पीड़ित निवेशकों से सघन पूछताछ की। इस दौरान निवेशकों की लंबी सूची, पैसे जमा करने के बदले दिए गए फर्जी रसीदें, बॉण्ड पेपर, मेमोरेण्डम और बैंक खातों के विवरण जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए। पुलिस की वित्तीय जांच में प्रमाणित हुआ कि आरोपितों ने अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से निवेशकों से कुल 9,26,60,554 (नौ करोड़ छब्बीस लाख साठ हजार पांच सौ चौवन) रुपये की विशाल राशि एकत्र की थी। साक्ष्यों के आधार पर मामले में इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबंदी) अधिनियम 1978 की धारा 4, 5, 6 एवं छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों का हितों का संरक्षण नियम 2005 की धारा 10 के तहत गंभीर अपराध दर्ज किया गया।
पुलिस टीम की लगातार घेराबंदी के परिणामस्वरूप दोनों नामजद आरोपितों को हिरासत में लिया गया। पकड़े गए आरोपितों की पहचान अखिलेश कुमार प्रजापति (उम्र 56 वर्ष, निवासी सिंगड़ूरिया, पलामू, झारखण्ड) और बलराम पाठक (उम्र 64 वर्ष, निवासी लोहड़ी, पलामू, झारखण्ड) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान आरोपितों को कानूनी नोटिस दिया गया, जिसके जवाब में उन्होंने कंपनी में ऊंचे पदों पर रहकर अवैध प्रचार-प्रसार करने और भारी आर्थिक लाभ कमाने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपितों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनसे वे कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों के संपर्क में थे। पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपितों को 27 मई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
इस जटिल वित्तीय अपराध की गुत्थी सुलझाने और आरोपियों को दबोचने में गांधीनगर थाना प्रभारी व निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, सहायक उपनिरीक्षक (सउनि) अभिषेक दुबे, आरक्षक रिषभ सिंह, अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह तथा अतुल सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रही।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

