home page

करोड़ों की वित्तीय अनियमितता के आरोप में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निलंबित

 | 
करोड़ों की वित्तीय अनियमितता के आरोप में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निलंबित


उमरिया, 24 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, भोपाल की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.के. (संतोष कुमार) यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक की संभागीय शाखा रीवा निर्धारित किया गया है।

यह कार्रवाई दिल्ली के अधिवक्ता एवं टीएनटी लीगल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुणाल ठाकुर द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यापक वित्तीय अनियमितताएं कीं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले की जांच में लंबे समय तक देरी हुई, लेकिन लगातार अनुस्मारक भेजे जाने और आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, भोपाल के निर्देश के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी।

शिकायत के अनुसार उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों की विभिन्न शाखाओं एवं सहकारी समितियों में आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। आरोप है कि नौगवां, कुम्हरवाह, कोटरी और राजेंद्रग्राम सहित कई समितियों में अनियमित तरीके से राशि की वसूली की गई तथा कुछ मामलों में धनराशि निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कराई गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ शाखा प्रबंधकों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है, जिनकी जांच अभी जारी है।

मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध संचालक मनोज कुमार गुप्ता द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्यप्रदेश के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय जांच दल ने अंतरिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में वर्ष 2023-24 के धान उपार्जन के दौरान खरीदी व्यय को शासन की निर्धारित सीमा से अधिक दर्शाने, फील्ड कर्मचारियों से अपने खाते में धन हस्तांतरित कराने तथा नव नियुक्त समिति प्रबंधकों से विभिन्न मदों के नाम पर अपने बैंक खाते में राशि जमा कराने जैसी गंभीर आर्थिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

जांच दल ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना है। आदेश के अनुसार अधिकारी का आचरण बैंक सेवा नियमों के तहत गंभीर दुराचार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक के सेवा नियमों के प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

शिकायतकर्ता कुणाल ठाकुर ने दावा किया है कि इस मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध भी जांच जारी है तथा संबंधित शिकायतें आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और लोकायुक्त को भी भेजी गई हैं। फिलहाल बैंक प्रबंधन की ओर से अन्य संभावित आरोपितों के संबंध में कोई आधिकारिक कार्रवाई घोषित नहीं की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी