म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
नई दिल्ली, 08 जून (हि.स.)। कमीशन के बदले साइबर जालसाजों को म्यूल अकाउंट (साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट) उपलब्ध कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस की टीम ने दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान जयपुर के रोहित कुमार बैरवा और लोकेश महावर के रूप में हुई है। जांच के दौरान साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसों को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए लगभग 30 म्यूल बैंक अकाउंट्स की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य आरोपितों एवं मुख्य साइबर अपराधियों की तलाश में जुटी है।
मध्य जिला उपायुक्त राेहित राजबीर सिंह के मुताबिक 23 अप्रैल को एक रिपोर्ट दर्ज कराते हुए शिकायतकर्ता ने बताया कि 22 अप्रैल को उनका मोबाइल फोन अचानक हैक हो गया। कुछ समय बाद जब मोबाइल सामान्य हुआ, तो उनके बैंक खाते से 95 हजार रुपये निकाल गए। इसके बाद अगले दिन उसी खाते से अचानक 96 हजार और निकल गए। जालसाजों ने उनके खाते से धोखाधड़ी करके कुल 1.91 लाख की ठगी की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और जांच के दौरान पैसों के लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से निकाली गई रकम कई बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए थे। इनमें रोहित कुमार बैरवा के नाम पर एक यस बैंक खाता और एक अन्य लाभार्थी का कोटक महिंद्रा बैंक खाता शामिल था। लाभार्थी के खाते की जानकारी के विश्लेषण और पूछताछ के बाद टीम जयपुर पहुंची जहां से राेहित को दबोचा गया।
पूछताछ में पता चला कि उसने धोखाधड़ी से मिले पैसों पर दो प्रतिशत कमीशन के बदले लोकेश महावर को कई बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए थे। उसकी निशानदेही पर टीम ने उसकी दिन लोकेश को भी दबोच लिया।
आगे की पूछताछ में पता चला कि लोकेश साइबर धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों को म्यूल बैंक खाते दिलाने और सप्लाई करने में शामिल था। उसने साइबर ठगों से मिले पैसों को इधर-उधर भेजने के लिए लगभग 30 म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए थे। ऐसे अकाउंट दिलाने के लिए उसे कमीशन मिलता था और वह धोखाधड़ी से मिले पैसे लेने और ट्रांसफर करने वाले एक बड़े नेटवर्क को चला रहा था।
ऐसे करते थे जालसाज ठगी
गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी करने वाले ठग पीड़ितों के मोबाइल फोन और बैंकिंग एप्लिकेशन का अनधिकृत एक्सेस (बिना इजाजत एक्सेस) हासिल कर लेते थे। धोखाधड़ी से हासिल पैसे को गिरोह द्वारा तैयार किए गए म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कर देते थे। जांच में मनी लान्ड्रिंग के नाम पर ठगी भी सामने आइ, जिसमें अकाउंट होल्डर्स के नाम पर लोन (गोल्ड लोन सहित) लिए गए और बाद में धोखाधड़ी से मिले पैसों का इस्तेमाल करके उन्हें चुकाया गया, ताकि गैर-कानूनी पैसों के स्रोत को छिपाया जा सके और उन्हें वैध पैसा दिखाया जा सके।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

