साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग गिरोह का भंडाफोड़, राजस्थान से चार आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली, 19 जून (हि.स.)। केंद्रीय जिला साइबर थाना पुलिस ने दो लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का पर्दाफाश करते हुए एक संगठित साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान से चार आरोपिताें को गिरफ्तार किया है। आरोपिताें पर साइबर ठगी से हासिल रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजकर मनी लॉन्ड्रिंग करने और ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपिताें की पहचान अभिषेक सिहाग, अंकित गढ़वाल, विकास बेनीवाल और लोकेश कुमार के रूप में हुई है। चारों आरोपिताें को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, चार नवंबर 2025 को साइबर थाना, केंद्रीय जिला में सुमन कुमार की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के बैंक खाते से दो लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हुई थी। इस ठगी का खुलासा तब हुआ, जब अमेरिका में रह रहे उनके बेटे ने बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन देखा और शिकायत दर्ज कराने के लिए भारत पहुंचा। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम सबसे पहले कर्नाटक बैंक के एक खाते में ट्रांसफर की गई और इसके बाद रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
पुलिस ने बैंक खातों के लेनदेन, तकनीकी विश्लेषण, आईपी लॉग और मोबाइल नंबरों की गहन जांच की। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को राजस्थान के सीकर जिले में सक्रिय एक संगठित साइबर गिरोह की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने राजस्थान के सीकर जिले की खंडेला तहसील के केरपुरा गांव में छापेमारी कर चारों आरोपिताें को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपित साइबर अपराध से अर्जित रकम को ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के जरिए खपाते थे। ठगी की रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाया जाता था, ताकि मनी ट्रेल को छिपाया जा सके। बाद में इस रकम का इस्तेमाल जुआ-सट्टे से जुड़े लेनदेन के निपटान में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपित जांच एजेंसियों से बचने के लिए वर्चुअल और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते थे। इन नंबरों से जुड़े व्हाट्सएप अकाउंट और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क में रहते थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी छात्रों और युवाओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ का झांसा देकर उनके बैंक खाते हासिल करते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था। पुलिस ने आरोपिताें के कब्जे से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, व्हाट्सएप चैट, बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। इन साक्ष्यों से आरोपिताें की भूमिका और पूरे आपराधिक नेटवर्क के संचालन का खुलासा हुआ।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (मध्य रेंज) मधुर वर्मा ने शुक्रवार को बताया कि यह कार्रवाई तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ‘वर्क फ्रॉम होम’ या आसान कमाई के नाम पर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ-साथ साइबर ठगी से अर्जित अतिरिक्त रकम का पता लगाया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

