महिला की मौत के मामले में आरोपी पति को बचाने में जुटी गुजरात पुलिस
जोधपुर, 08 मई (हि.स.)। जोधपुर निवासी एक महिला की अहमदाबाद स्थित ससुराल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में पीहर पक्ष ने स्वत्रंत जांच एजेंसी से जांच करवाने की मांग की है। पीहर पक्ष का आरोप है कि मामले में आरोपी पति हैड कांस्टेबल को बचाने में गुजरात पुलिस जुटी हुई है। मृतका के भाई और परिजनों को जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है और इस दौरान सभी लिखा पढ़ी गुजराती भाषा में करने के लिए दबाव बनाया गया।
मृतका के भाई पाल रोड निवासी नत्थूसिंह उर्फ नवीन राजपुरोहित ने बताया कि गुजरात पुलिस में कार्यरत उसके बहनोई ने सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया और उसकी बहन गीता के फंदा लगाकर आत्महत्या करने की जानकारी परिजनों को दी।
लेकिन मौके पर न तो पुलिस को बुलाया और नहीं एफएसएल टीम को। खुद ही फंदे से उतारकर अस्पताल ले गया और डाक्टरों के मृत घोषित करने पर पीहर पक्ष को सूचित किया। उन्होने बताया कि उसकी बहन की शादी तेरह वर्ष पूर्व अर्जुनसिंह के साथ हुई थी और उनके एक पुत्री और एक पुत्र भी है जिनको भी परिजनों से इस घटना के बाद मिलने नहीं दिया गया। परिजन जब गीता की मौत की सूचना पर अहमदाबाद स्थित उसके मकान जीवराज पार्क सोसायटी पर पहुंचे तो मौका हालात संदिग्ध लगे जिस पर उन्होंने संबंधित थाना वासना में रिपोर्ट दी।
इस पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। घटना के बाद परिजन आरोपी गीता के पति और परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट लेकर थाने और पुलिस के आला अधिकारियों के यहां भटकते रहे। बाद में 24 अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया गया।हालांकि 16 अप्रैल को ही उन्होंने लिखित में शिकायत दे दी थी लेकिन प्रभावी जांच शुरू नहीं की गई। उन्होंने कहा कि न तो पुलिस ने गीता के पीहर पक्ष के बयान लिए और नहीं इतने दिन बाद भी कोई गिरफ्तार हुई है जबकि संबंधित थाना क्षेत्र के सेशन कोर्ट में आरोपी अर्जुनसिंह की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। गीता के परिजनों ने गुजरात और केन्द्र सरकार से मांग की है कि इस प्रकरण की जांच सीबीआई या निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच करवाई जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

