राशन गबन के 2 मामलों में उचित मूल्य दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण, 24 हजार किलो से ज्यादा गेहूं का गबन, दोनों का लाइसेंस निरस्त
चित्तौड़गढ़, 11 जुलाई (हि.स.)। जिला रसद विभाग की जांच में गबन पाए जाने पर प्रवर्तन अधिकारी की और से शंभूपुरा थाने में दो उचित मूल्य दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाएं है। दोनों दुकानों पर लाखों रुपए का राशन गबन कर निजी लाभ लेने का आरोप है। रसद विभाग ने दोनों के लाइसेंस निलंबित कर दिए है।
शंभूपुरा थानाधिकारी धर्मराज मीणा ने बताया कि पुलिस थाने पर रद्द विभाग चित्तौड़गढ़ से प्रवर्तन अधिकारी सुमन तिवारी ने रिपोर्ट दी है। इसमें बताया कि आरोपी जनक कंवर, उचित मूल्य दुकान चित्तौड़गढ़ तहसील के गिलुण्ड (पोस कोड 31354) की 7 जुलाई 2025 को आकस्मिक जांच की। इसमें दुकान बंद पाई गई। उपभोक्ताओं ने बताया कि डीलर माह में सिर्फ 2-3 दिन ही दुकान खोलता है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर 18 जून को डीएसओ ने आदेश जारी कर डीलर को निलम्बित किया गया। निलम्बन के बाद चार्ज आदान-प्रदान के समय POS मशीन में 25,436 किलोग्राम गेहूं दर्ज था। लेकिन मौके पर केवल 1384 किग्रा गेहूं ही सुपुर्द किया गया। इस प्रकार 24,052 हजार किलोग्राम गेहूं गबन की श्रेणी में आया। इस संबंध में नोटिस 10 अक्टूबर 2025 जारी किया गया, जिसका संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर जिला रसद अधिकारी ने 19 मार्च 2026 को प्राधिकार पत्र निरस्त कर दिया। थानाधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रवर्तन अधिकारी की रिपोर्ट पर मामला धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। इस संबंध में अनुसंधान किया जा रहा है।
चिकसी में 232.95 क्विंटल गेहूं गबन का मामला
थानाधिकारी ने बताया कि प्रवर्तन अधिकारी सुमन तिवारी ने एक और रिपोर्ट चिकसी के राशन डीलर के खिलाफ दी है। इसमें बताया कि गौरव सरगरा, उचित मूल्य दुकान चिकसी (पोस कोड 31047) की 23 मई 2025 को जांच में दुकान बंद मिली थी। डीलर का मोबाइल भी बंद था। उपभोक्ताओं ने बताया कि डीलर घर-घर जाकर अंगूठे लगवा लेता है लेकिन राशन नहीं देता। इस गड़बड़ी पर आदेश 18 जून 2025 से निलम्बन किया गया। चार्ज आदान-प्रदान में POS मशीन में 232.95 क्विंटल गेहूं दर्ज था, लेकिन शून्य मात्रा सुपुर्द की गई। इस पर 10 अक्टूबर 2025 को नोटिस जारी किया। इसके जवाब में डीलर ने बीमारी और पारिवारिक समस्या का हवाला दिया। मामले में जिला रसद अधिकारी ने 19 मार्च 2026 से प्राधिकार पत्र निरस्त कर दिया। दोनों ही मामलों में राजस्थान खाद्यान्न (वितरण का विनियमन) आदेश 1976 की शर्त 2,5,9,11 व 17(सी) व सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 का उल्लंघन पाया गया। पुलिस ने दोनों प्रकरणों में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल

