एयर टिकट की बुकिंग करने के नाम पर ठगी करने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश,13 गिरफ्तार
नोएडा, 14 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में नोएडा शहर के थाना सेक्टर-63 पुलिस ने शनिवार की बीती रात को सस्ते एयर टिकट बुकिंग के नाम पर जालसाजी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया। पुलिस ने 13 ठगों को गिरफ्तार किया है।
आरोपित सेक्टर-63 में कॉल सेंटर चला रहे थे। गूगल-फेसबुक पर विज्ञापन देकर अमेरिका व यूरोप के नागरिकों को फर्जी टिकट भेजकर अपने मोबाइल और ई-मेल बंद कर देते थे। कई को टिकट भी नहीं भेजते थे। ये अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुके हैं। पुलिस आरोपितों के बैंक खातों, अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे और विदेशी संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक इनके तार दूसरे देशों से जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस उपायुक्त शैलेंद्र कुमार ने रविवार को बताया कि पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सूचना के आधार पर कार्रवाई की। आरोपित विज्ञापन चलाकर विदेशी नागरिकों को अपनी वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर की जानकारी देते थे। जब कोई एयरलाइन टिकट बुक करने या यात्रा संबंधी सहायता के लिए संपर्क करता था तो जालसाज खुद को प्रतिष्ठित एयरलाइंस या ट्रैवल एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर कम कीमत पर टिकट उपलब्ध कराने का आश्वासन देते थे। इसके बाद डॉलर में भुगतान लेते थे और उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते थे।
उन्होंने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपी अधिकतर टिकट कई माह बाद की यात्रा के लिए बुक करते थे ताकि ठगी का पता देर से लगे। इस बीच आरोपी अपने मोबाइल नंबर, ई-मेल और तकनीकी सिस्टम बदल लेते थे। पुलिस जांच में बरामद डिजिटल उपकरणों से करीब 10 करोड़ रुपये (10.50 लाख अमेरिकी डॉलर) के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों का डेटा भी बरामद हुआ है।
पुलिस उपायुक्त का कहना है कि यहां एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क चल रहा था। गिरोह के सदस्य उच्च शिक्षित हैं और अमेरिकी और ब्रिटिश एक्सेंट में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में हवाला कनेक्शन भी सामने आ सकता है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। आरोपित वीओआईपी कॉल से बात करते थे। वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल ) कॉलिंग इंटरनेट-बेस्ड कॉलिंग तकनीक है। साइबर अपराधी वीओआईपी तकनीक का इस्तेमाल कर फेक नंबर से कॉल करते हैं, जो किसी बैंक, सरकारी एजेंसी या कंपनी का नंबर स्पूफ करके वास्तविक कॉल जैसा दिखाते हैं। कॉलर आईडी में असली नंबर दिखाई देता है लेकिन वास्तव में कॉल किसी और जगह से आ रही होती है। वीओआईपी कॉलिंग के जरिए इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल की तरह दिखाया जाता है। इस कॉल को ट्रेस करना मुश्किल होता है क्योंकि यह इंटरनेट-आधारित कॉलिंग होती है।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में रवि खुराना, साहिब चौहान, प्रत्यक्ष शर्मा, देव अग्रवाल, दिलीप पांडेय, दीपक कुमार, शुभम चौधरी, आरती और स्वाति दिल्ली के अलग-अलग इलाके के रहने वाले हैं। शोभित दीक्षित मूल रूप से आगरा का, रितिक राय वाराणसी का रहने वाला है। दोनों सेक्टर-73 नोएडा में रहते हैं। हिमांशु मलिक बुलंदशहर का रहने वाला और वसुंधरा में रहता है। जितेश कामरा नोएडा एक्सटेंशन का, शुभम चौधरी बिहार का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि उनके पास से 13 लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, एक राउटर, 10 माइक-हेडफोन, कूट-रचित दस्तावेज, विदेशी नागरिकों का डेटा, करीब 10 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य बरामद हुआ है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

