बच्ची बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, घटना की मुख्य आरोपी निकली सरकारी नर्स
श्योपुर, 05 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में विगत दिनों एनएच-552 हाइवे पर लावारिस मिली एक बच्ची के मामले से शुरू की गई जांच बच्चों को बेचने वाले एक गिरोह तक पहुंच गई है। मंगलवार को पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल ने इस मामले का खुलासा किया है। जिसमें इस घटनाक्रम की मुख्य आरोपी सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह पूरा प्रकरण 18 अप्रैल को सोंई गांव के पास स्थित ढाबे के पास सड़क पर लावारिश हालत में छोड़ी गई बच्ची से शुरू हुआ। जहां एक ढाई साल की मासूम बच्ची ग्रामीणों को सड़क किनारे बिलखती मिली थी। पुलिस द्वारा की गई जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इस बच्ची को एक लाख रुपए में बेचा था। इस मामले की पडताल के बाद इंदौर के उन लोगों को पकड़ा गया जो बच्ची के फर्जी माता पिता बनकर उसे गोद लेना बता रहे थे, लेकिन आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण पुलिस इस मामले में पूर्व में ही छह लोगों को जेल भेज चुकी है।
नर्स ने माता-पिता को बहलाकर ली थी बच्ची
इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य आरोपी सरकारी अस्पताल की नर्स काजट पटेल को माना गया है, जिसने बच्ची के परिजनों को उसके माता-पिता की छटवीं संतान होने पर उसका भरण पोषण बेहतर तरीके से नहीं कर पाने की बात करते हुए बच्ची के माता-पिता को बहाल-फुसलाकर लिया गया था। काजल ने उन्हें झांसा दिया कि वे बच्ची को पाल नहीं पाएंगे, इसलिए किसी अच्छे परिवार को सौंप देते हैं ताकि उसका भविष्य संवर जाए। माता-पिता उसकी बातों में आ गए और बच्ची काजल के हवाले कर दी, जिसने आगे उसका सौदा कर दिया।
एक और बच्ची मिली, पुलिस कर रही है कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक और डेढ़ साल की बच्ची को छुड़वाया है, जिसका फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया था। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने और कितने बच्चे बेचे हैं। बच्ची के असली माता-पिता की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है। पुलिस इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत वैष्णव

