राजगढ़ःदो करोड़ की ठगी के मामले में 14 आरोपित गिरफ्तार, 2.92 करोड़ का मशरूका जब्त
राजगढ़, 27 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पुलिस टीम ने पैसे दोगुने करने और बड़ी कंपनी में निवेश के नाम पर ब्यावरा के एक व्यक्ति से दो करोड़ की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने करीब 35 दिनों तक 10 राज्यों में 30 हजार किलोमीटर पीछा कर 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया, साथ उनके कब्जे से 1 करोड़ 73 लाख 16 हजार नकद, चार लग्जरी कारें और 19 एंड्रॉयड मोबाइल समेत कुल 2 करोड़ 92 लाख 91 हजार का मशरूका जब्त किया है।
पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने गुरुवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में खुलासा करते हुए बताया कि 24 जुलाई को ब्यावरा निवासी 46 वर्षीय देवेंद्र पालीवाल ने ब्यावरा शहर थाने में शिकायत की। प्रफुल्ल गजभिये ने खुद को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताकर निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा दिया। इसके बाद अन्य आरोपितों से मुलाकात कराई गई। आरोपितों ने फर्जी ई-मेल, दस्तावेज और भुगतान संदेश दिखाकर कंपनी और निवेश योजना को वास्तविक बताया। आरोपियों ने देवेंद्र से 2 करोड़ निवेश करने पर अधिक रकम वापस मिलने का भरोसा दिलाया।
22 जुलाई को भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कोरियर कार्यालय में उनसे 2 करोड़ नकद ले लिए गए। इसके बाद 4 करोड़ के फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर आरोपित फरार हो गए। रकम वापस नहीं मिलने पर ठगी का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने ब्यावरा और भोपाल के होटलों में फरियादी से कई बैठकें की थीं। किसी ने कंपनी एजेंट, किसी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट तो किसी ने कंपनी डायरेक्टर बनकर खुद को पेश किया। गिरोह का नेटवर्क कई स्तरों में बंटा था। एक आरोपित को अपने ऊपर और नीचे की लिंक की सीमित जानकारी होती थी और सदस्य ट्रेड नाम से काम करते थे।
पुलिस के मुताबिक नकदी लेने के बाद रकम को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों और व्यक्तियों तक पहुंचाया गया। पुलिस टीम ने महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तेलंगाना समेत 10 राज्यों में दबिश देकर 14 आरोपितों को पकड़ा, जिनमें आरिफ पुत्र साजोद्दीन हुसैन, अशौक पुत्र मांगीलाल चौधरी निवासी महाराष्ट्र, नवीन पुत्र चेतन प्रकाश निवासी राजस्थान, सन्नी उर्फ षमीम पुत्र अजीजुल मंडल, मुस्कीम पुत्र नसुद्दीन मंडल, कांतीलाल पुत्र नारायणलाल माली, बोनी यामीन पुत्र मोनीरुज्जुमान मंडल, वासुदेव पुत्र गंगाधर गाडेकर, दिनेष पुत्र अशोक वीरानी, प्रफुल्ल पुत्र अम्बादास गजभिये, सचिन पुत्र मारकुंड कामले, सुजीत पुत्र रामाजी टेंबेकर, माधव पुत्र पूराजी असोरे,साहिल पुत्र रमेश नीसवाडे शामिल है।
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह इंदौर में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की योजना बना रहा था, लेकिन राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई के कारण योजना सफल नहीं हो सकी। पुलिस को आरोपितों द्वारा पश्चिम बंगाल में 50 लाख और दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के साथ भी 50 लाख की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी मिली है। गिरोह के कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई में होने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब फर्जी कंपनियों, ई-मेल, बैंक खातों और हवाला नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कम समय में पैसा दोगुना करने या अत्यधिक लाभ का लालच देने वाली निवेश योजनाओं में बिना सत्यापन पैसा न लगाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

