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गजब का खेल ! खुद को मुर्दा घोषित कर बच रहा था हत्या का आरोपित गिरफ्तार, बकरे की लाश जलाकर बनवाया था मृत्यु प्रमाण पत्र

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गजब का खेल ! खुद को मुर्दा घोषित कर बच रहा था हत्या का आरोपित गिरफ्तार, बकरे की लाश जलाकर बनवाया था मृत्यु प्रमाण पत्र


मऊ, 25 अक्टूबर (हि.स.)। उत्त्तर प्रदेश के जनपद मऊ में खुद को मुर्दा घोषित कर हत्या का आरोपित बचने की काेशिश कर रहा था । उसने बकरे की लाश जलाकर मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया था लेकिन पुलिस से नहीं बच पाया और राजू उर्फ राजकुमार राजभर को गिरफ्तार कर लिया। आराेपित

वर्ष 2016 में योगेश सिंह की हत्या के मामले में वांछित था।अब इस प्रकरण में दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के भी फंसने के आसार हैं।

कानून की गिरफ्त से बचने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी मौत का ऐसा नाटक रचा कि परिवार में तेरहवीं तक हो गई और सरकारी अभिलेखों में भी उसे मृत दिखाए जाने का मामला सामने आ गया। लेकिन पुलिस की नजरों से वह ज्यादा दिनों तक बच नहीं सका। मऊ कोतवाली पुलिस ने खुद को मृत घोषित कर फरारी काट रहे राजू उर्फ राजकुमार राजभर को ख्वाजाहापुर गांव से रविवार काे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित वर्ष 2016 में योगेश सिंह की हत्या के मामले में वांछित था। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद इस पूरे कथित षड्यंत्र की परतें खुलने लगी हैं।

हत्या के मुकदमे में सजा का डर, इसलिए रची मौत की साजिश

अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने आज प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राजू उर्फ राजकुमार राजभर की उम्र करीब 38 वर्ष है और वह स्टेडियम के पास ख्वाजाहापुर क्षेत्र का निवासी है। वह पहले मुंबई में काम करता था, बाद में शेयर मार्केट ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से जुड़ गया। वर्ष 2016 में मऊ में योगेश सिंह की हत्या के मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। पुलिस का कहना है कि आरोपित को आशंका थी कि मुकदमे में उसे आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। इसी डर से उसने खुद को मृत घोषित कराने की कथित साजिश रची।

बेहोशी से लेकर श्मशान तक का कथित नाटक, बकरे की देह जलाने का दावा

अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक आरोपित को कथित तौर पर फर्जी तरीके से बेहोश कर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उसकी तस्वीरों को एडिट करके ऐसा दिखाया गया, मानो वह श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए रखा हो। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर वहां से शव को हटाकर बकरे की देह जलाई गई, ताकि लोगों को उसकी मौत का विश्वास हो जाए। इसके बाद गाजीपुर जनपद से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन सभी तथ्यों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर की जानी है।

दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के पैसे भी लगे थे ट्रेडिंग में

पुलिस के मुताबिक, राजकुमार ट्रेडिंग का काम करता था और कई लोगों ने उसके कारोबार में पैसा लगाया था। इनमें दो होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल हैं। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपित के अनुसार, इन डॉक्टरों ने उसे कथित तौर पर खुद को मृत दिखाने की सलाह दी थी। इस योजना के पीछे एक उद्देश्य सजा से बचना और दूसरा निवेशकों के पैसे लौटाने से बचने की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस अब दोनों डॉक्टरों से पूछताछ कर उनकी भूमिका की जांच करेगी। हालांकि, उनकी संलिप्तता अभी जांच का विषय है।

पत्नी ने की तेरहवीं, 10 लाख रुपये के बीमा भुगतान की भी जांच

इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। पुलिस अधिकारी के बयान के मुताबिक, आरोपी की पत्नी को उसकी मृत्यु की सूचना दी गई थी और परंपरा के अनुसार तेरहवीं भी हो चुकी थी। यह भी बताया गया कि पत्नी को करीब 10 लाख रुपये की बीमा राशि मिली थी। अब पुलिस इस बात की जांच करेगी कि बीमा का भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था। इस संबंध में किसी भी संभावित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

18 महीने से बदल रहा था ठिकाना, पुलिस टीम ने आखिरकार दबोचा

अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि पुलिस की सिविल लाइंस टीम आरोपित की तलाश में जुटी थी। उसके लगातार ठिकाने बदलकर रहने की सूचना मिल रही थी। पुलिस को आशंका थी कि वह जनपद के आसपास ही कहीं छिपा हुआ है। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने ख्वाजाहापुर गांव में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारी के मुताबिक, आरोपी के खुद को मृत घोषित कराने के बाद करीब 18 महीने तक फरार रहने की बात सामने आई है।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वालों पर भी होगी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपित के खिलाफ नए मुकदमे में कार्रवाई शुरू करने और पूरे मामले की विवेचना करने की बात कही है। अपर पुलिस अधीक्षक के अनुसार, कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने, तस्वीरों से छेड़छाड़ करने और अन्य दस्तावेजों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता और अपराध में भूमिका के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की प्रक्रिया की जाएगी। इस सनसनीखेज मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हत्या के मुकदमे से बचने के लिए कथित तौर पर रची गई मौत की कहानी में और कौन-कौन शामिल था।

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हिन्दुस्थान समाचार / वेद नारायण मिश्र