अंबिकापुर : अक्षत अग्रवाल हत्याकांड मामले में आरोपित संजीव मंडल को उम्रकैद की सजा
अंबिकापुर, 18 अगस्त (हि.स.)। करीब दो साल पहले हुए चर्चित स्टील कारोबारी अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने आरोपित संजीव मंडल को दोषी करार देते हुए आज मंगलवार को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित ने दावा किया था कि, अक्षत ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। हालांकि, अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर उसे हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना गया। हत्या के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं।
मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। 21 अगस्त 2024 को डिगमा इलाके में अंबिका स्टील इंडस्ट्रीज के मालिक महेश केडिया के बेटे अक्षत अग्रवाल (23) का शव उसकी कार में मिला था। घटना के अगले ही दिन पुलिस ने कंपनी के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को हिरासत में ले लिया था।
जांच के दौरान पुलिस ने संजीव मंडल के कब्जे से तीन पिस्टल और 31 कारतूस बरामद किए थे। इसके अलावा 50 हजार रुपये नकद, अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी भी बरामद होने की बात सामने आई थी।
पूछताछ में संजीव ने पुलिस के सामने अलग कहानी बताई थी। उसका दावा था कि, अक्षत ने ही अपनी हत्या की सुपारी दी थी और हथियार व कारतूस भी वही लेकर आया था।
आरोपित के पुलिस बयान के मुताबिक, अक्षत ने उससे खुद को गोली मारने के लिए कहा था। संजीव का दावा था कि, उसने अक्षत पर पिस्टल तानी, लेकिन गोली चलाने की हिम्मत नहीं हुई। इसके बाद अक्षत ने कथित तौर पर खुद ट्रिगर दबा दिया और गोली उसके सीने में लगी। संजीव ने यह भी दावा किया था कि, इसके बाद उसने दो और फायर किए।
हालांकि, अदालत में संजीव अपने पुलिस बयान से पलट गया और खुद को निर्दोष बताया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अदालत की अनुमति से उसका नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था। इन जांचों में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आने की बात पुलिस ने कही।
मामले की सुनवाई जिला न्यायालय के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत में हुई। करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों, डॉक्टरों, फॉरेंसिक टीम, मृतक के परिजनों और दोस्तों सहित कुल 33 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
अतिरिक्त लोक अभियोजक के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अक्षत को तीन गोलियां नजदीक से लगने की जानकारी सामने आई थी। वहीं परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से घटना के समय अक्षत और संजीव की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि होने की बात अभियोजन पक्ष ने अदालत में रखी।
इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने संजीव मंडल को हत्या और हथियार रखने के मामले में दोषी माना। भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत उसे आजीवन सश्रम कारावास और आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में आरोपित के ‘सुपारी देकर खुद की हत्या’ वाले दावे की पुष्टि नहीं हुई। वहीं हत्या की वास्तविक वजह को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

