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पुलिस कमिश्नर कार्यालय में 5,600 करोड़ की ठगी में फरार इख्लाख ने किया आत्मसमर्पण

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पुलिस कमिश्नर कार्यालय में 5,600 करोड़ की ठगी में फरार इख्लाख ने किया आत्मसमर्पण


कानपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। 5,600 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में फरार रिटायर्ड दरोगा ताजदार के बेटे इख्लाख हुसैन ने बुधवार को पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सरेंडर कर दिया। उसके चार बैंक खातों में आठ दिन में सात करोड़ 53 लाख रुपये का लेनदेन मिला है। पुलिस इस रकम को गेमिंग ऐप से हुई ठगी से जोड़कर जांच कर रही है। स्टाफ ऑफिसर योगेश कुमार ने बताया कि खातों के लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

शाहजेब वारिस और सलमान की गिरफ्तारी के बाद जांच में इख्लाख का नाम सामने आया था। पूछताछ में उसने बताया कि बासमंडी के सोहनलाल के हाते में रहने वाला मो. आमिर उसके बैंक खाते संभालता था। पुलिस ने आमिर को भी हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ में 19 नए बैंक खातों की जानकारी मिली है।

इख्लाख की लोकेशन लखनऊ के लुलु मॉल में मिलने के बाद पुलिस ने वहां दबिश दी थी, लेकिन वह निकल गया। इसके बाद उसके नेपाल भागने की सूचना मिली। पुलिस उस पर इनाम घोषित करने की तैयारी कर रही थी। इसी बीच उसने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

पुलिस को इख्लाख के नाम से एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के खाते मिले हैं। इनमें क्रमशः एक करोड़ नौ लाख, एक करोड़ 84 लाख, एक करोड़ 10 लाख और तीन करोड़ 50 लाख रुपये का लेनदेन मिला। इख्लाख ने बताया कि वह होटल लीज पर चलाता है और उसकी जीएसटी फर्म है। उसके अनुसार आमिर ने ही उसे गिरोह से जोड़ा था और खाते संचालित करता था।

आमिर से पूछताछ में एचडीएफसी, आईडीबीआई और एक्सिस बैंक से जुड़े 19 और खातों का पता चला है। पुलिस के अनुसार शाहजेब वारिस फर्जी फर्मों के नाम पर चालू खाते खुलवाता था। पहले 76 खातों की जानकारी मिली थी। जांच में आठ पैन नंबर और पांच मोबाइल नंबर भी सामने आए हैं। एक पैन से जुड़े छह क्लस्टर खाते मिले हैं। पुलिस इन खातों के लेनदेन की जांच कर रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद 65 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं।

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 में इख्लाख के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में महज आठ दिन में करीब 180 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। खाते में करीब 1200 प्रविष्टियां दर्ज थीं। तब पूछताछ में उसने जीएसटी, शेयर ट्रेडिंग और अन्य कारोबार की जानकारी दी थी। अब पुराने लेनदेन को भी मौजूदा साइबर ठगी की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांच में इख्लाख के साथी मो. आरिफ का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी फर्म के लिए दो करोड़ रुपये का ऋण लेने का प्रयास किया। बैंक के सर्वेक्षक मनीष पर कथित तौर पर 20 लाख रुपये लेकर एक करोड़ 75 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराने का आरोप है। पुलिस ने बैंक को नोटिस भेजा है और मामले में कार्रवाई की तैयारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप