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रायपुर : सुपरवाईजर से लूट की घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य आरोपित सहित दो गिरफ्तार

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रायपुर : सुपरवाईजर से लूट की घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य आरोपित सहित दो गिरफ्तार


रायपुर : सुपरवाईजर से लूट की घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य आरोपित सहित दो गिरफ्तार


रायपुर, 10 जून (हि.स.)। सुपरवाईजर से लूट की घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का पुलिस ने आज बुधवार को पर्दाफाश किया है। राजधानी रायपुर के डंगनिया बाजार में छह जून को गैस एजेंसी के सुपरवाइजर से 10.26 लाख रुपये लूटने के मामले में रायपुर पुलिस ने मुख्य आरोपित गौरव तिवारी और उसके साथी आशीष पाण्डेय उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि, ऑनलाइन सट्टे में भारी नुकसान झेलने के बाद गौरव ने जल्दी पैसा कमाने के लिए इस लूट की योजना बनाई थी।

पुलिस के अनुसार, 27 वर्षीय गौरव तिवारी पहले बालाजी कंपनी में पेमेंट और लेन-देन के सिलसिले में आता-जाता था। इसी दौरान उसे यह जानकारी मिली कि अग्रसेन चौक स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय से कई बार कर्मचारी लाखों रुपये नकद लेकर निकलते हैं। सट्टे में हुए नुकसान की भरपाई करने और मोटी रकम हासिल करने के उद्देश्य से उसने अपने चार साथियों को इस बारे में बताया और फिर सबने मिलकर लूट की पूरी रणनीति तैयार की।

जांच में सामने आया है कि आरोपितों का कोई तय शिकार नहीं था। उनकी नजर केवल उस व्यक्ति पर रहती थी जो कार्यालय से नकदी से भरा बैग लेकर बाहर निकलता था। इसके लिए पांचों आरोपित करीब डेढ़ महीने तक कार्यालय और आसपास के इलाकों में रेकी करते रहे। कई बार उन्होंने कर्मचारियों का पीछा भी किया, लेकिन सही मौका नहीं मिलने के कारण वारदात को अंजाम नहीं दे पाए।

छह जून को कंपनी का सुपरवाइजर श्रवण साहू 10 लाख 26 हजार 500 रुपये लेकर कार्यालय से निकला। आरोपितों ने दो अलग-अलग दोपहिया वाहनों से उसका पीछा शुरू कर दिया। डंगनिया बाजार पहुंचकर जैसे ही वह कार से बैग निकालने लगा, तीन बदमाशों ने उसे धक्का देकर नकदी से भरा बैग छीन लिया और वहां से फरार हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद पांचों आरोपितों ने लूटी गई रकम का आपस में बंटवारा कर लिया और पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों की ओर निकल गए। किसी ने मध्य प्रदेश में ठिकाना बनाया तो कोई उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली की ओर भाग गया। ये सभी आरोपित आपस में पुराने दोस्त बताए जा रहे हैं और वारदात के बाद भी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे।

घटना के बाद पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और डीडी नगर पुलिस की एक संयुक्त टीम बनाई गई। इस टीम ने हजारों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तकनीकी विश्लेषण किया और कंपनी के कर्मचारियों से लेकर आसपास मौजूद लोगों तक से गहन पूछताछ की।

लगातार 72 घंटे चले इस कड़े इंटरस्टेट ऑपरेशन के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित गौरव तिवारी को दबोच लिया। बाद में उसकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के भदोही से दूसरे आरोपित आशीष पाण्डेय उर्फ गोलू को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपित गौरव तिवारी एमबीए की पढ़ाई कर चुका है, जबकि गिरफ्तार दूसरा आरोपित आशीष पाण्डेय ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। गौरव पहले भी दुर्ग जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस को गिरोह के अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पहले से आपराधिक रिकॉर्ड होने की जानकारी मिली है।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपितों के कब्जे से लूट की रकम में से सात लाख रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त एक्टिवा वाहन को जब्त कर लिया है। इस जब्त संपत्ति की कुल कीमत लगभग साढ़े सात लाख रुपये आंकी गई है। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपित अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें विभिन्न राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं। आरोपितों के विरूद्ध थाना डीडी नगर में अपराध क्रमांक 361/26 धारा 309(4), 3(5) बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर