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दो करोड़ रिश्वत मामले में एसओजी एएसपी सोनी गिरफ्तार

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दो करोड़ रिश्वत मामले में एसओजी एएसपी सोनी गिरफ्तार


उदयपुर, 27 सितम्बर (हि.स.)। दो करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में एसीबी उदयपुर ने एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी को रविवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। इससे एक दिन पहले शनिवार को एसीबी ने उनके कथित दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। रिश्वत की यह रकम उदयपुर नगर निगम के चर्चित 272 प्लॉट घोटाला मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के एवज में मांगी गई थी।

एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार परिवादी ने शिकायत दी थी कि उसके खिलाफ सूरजपोल थाने में 272 प्लॉट घोटाले से संबंधित मामला दर्ज है। इस प्रकरण की जांच एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी कर रहे थे। परिवादी का आरोप था कि मामले में एफआर लगाने के लिए दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप की कार्रवाई की और शनिवार को दलाल सज्जन सिंह जैन को रिश्वत की रकम लेते पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद एएसपी मुकेश सोनी को देर रात बालोतरा स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया, जिन्हें रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसीबी की कार्रवाई में परिवादी की ओर से चार लाख रुपये के असली नोट और 1.96 करोड़ रुपये के डमी नोट रखे गए थे। दलाल के रिश्वत की रकम से भरा बैग लेते ही एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। मामले में इंस्पेक्टर डॉ. सोनू शेखावत के नेतृत्व में कार्रवाई की गई।

एसीबी के अनुसार परिवादी का भरोसा जीतने के लिए सज्जन सिंह जैन ने उसकी मुलाकात एएसपी मुकेश सोनी से उदयपुर में एक चौराहे के पास खड़ी कार में करवाई थी। परिवादी के मुताबिक कार की आगे वाली सीट पर एएसपी मुकेश सोनी बैठे थे, जबकि पीछे की सीट पर परिवादी और सज्जन सिंह जैन मौजूद थे। बातचीत के दौरान दलाल ने मामला निपटाने के बदले दो करोड़ रुपये देने की बात कही। परिवादी का आरोप है कि बातचीत रिकॉर्ड होने की आशंका के चलते एएसपी पूरे समय चुप रहे। हालांकि आखिरी समय में उन्होंने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर केवल ‘2 करोड़’ लिखकर परिवादी को दिखाया और मामला खत्म होने का संकेत दिया।

एसीबी के अनुसार इसके बाद सज्जन सिंह जैन लगातार परिवादी के संपर्क में रहा। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने शनिवार को कार्रवाई कर उसे रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद एएसपी की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई गई और उन्हें भी गिरफ्तार किया गया।

272 प्लॉट घोटाला मामला फर्जी दस्तावेज तैयार कर खाली और रद्द भूखंडों पर अवैध कब्जा करने तथा उन्हें आगे बेचने से जुड़ा है। वर्ष 2012 में यूआईटी की ओर से कई कॉलोनियां नगर निगम को हस्तांतरित की गई थीं। इनमें कई प्लॉट खाली थे। आरोप है कि भू-माफियाओं और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से इन खाली भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार करवाई गईं तथा फर्जी व्यक्तियों के नाम नामांतरण खोलकर भूखंडों को आगे बेच दिया गया।

इस मामले में वर्ष 2022 में सूरजपोल थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। एसओजी ने चार अगस्त को सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। उनके घर से करीब दो किलो सोने के आभूषण और 11 लाख रुपए बरामद किए गए थे। एसीबी के अनुसार इसी जब्त सामान को वापस दिलाने और मामले में एफआर लगाने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी।

272 प्लॉट घोटाले का मामला करीब 500 करोड़ रुपए के कथित घोटाले से जुड़ा बताया गया है और यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। जांच के बाद नगर निगम ने 48 पट्टे निरस्त किए थे। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन भी इस मामले को विभिन्न स्तरों पर उठा चुके हैं। अप्रैल 2022 से एसओजी मामले की जांच कर रही है और प्रकरण में अब तक करीब छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मुकेश सोनी इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। वर्ष 2022 में अजमेर में नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में आरोपित को कथित लाभ पहुंचाने के आरोपों के बाद हाईकोर्ट ने मुकेश सोनी सहित तीन पुलिस अधिकारियों को रेंज से बाहर भेजने के आदेश दिए थे। वर्ष 2024 में वह एसओजी की अजमेर चौकी में तैनात रहे, जहां से उन्हें विभिन्न मामलों को लेकर हटाया गया था। नवंबर 2025 में उन्हें एसओजी की उदयपुर यूनिट में तैनात किया गया था।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता