home page

कानपुर : 80 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, पंजाब के दो ठग गिरफ्तार

 | 
कानपुर : 80 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, पंजाब के दो ठग गिरफ्तार


कानपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। जनपद में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा करते हुए पुलिस ने पंजाब के रहने वाले करन कसेरा और गुलशन को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में लोगों को ठगी का शिकार बनाकर फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करता था और पूरे नेटवर्क में करीब 80 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने शनिवार को प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपित गिरोह के लिए “म्यूल अकाउंट” यानी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। ठगी की रकम पहले अलग-अलग बैंकों के खातों में भेजी जाती थी और फिर कई लेयर में घुमाकर दिल्ली स्थित नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में ‘एके ट्रेडिंग’ नाम की फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर की जाती थी। यह फर्म पंजाब के अबोहर निवासी एक युवक के नाम पर खुलवाई गई थी, जो पेशे से मोची है। महज तीन महीने में इस खाते में 80 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन होना पूरे नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है।

मामले की शुरुआत जनवरी महीने में थाना नौबस्ता में दर्ज एफआईआर से हुई थी, जिसमें एक वादी से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 12 लाख 82 हजार रुपये की ठगी की गई थी। इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 66D (इंटरनेट के माध्यम से किसी को गुमराह करके उसका आर्थिक या मानसिक नुकसान करना) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। ट्रांजेक्शन ट्रेल खंगालने पर एक फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के खाते का पता चला, जिसमें भारी पैमाने पर लेनदेन किया गया था। इस प्रकरण में अजय नाम का आरोपी पहले ही दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि करन और गुलशन को अब गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपित अभी फरार हैं।

जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी जीएसटी नंबरों के आधार पर करंट अकाउंट खुलवाता था और उन्हीं के जरिए ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करता था। उत्तर प्रदेश में इस गिरोह के खिलाफ 13 मुकदमे दर्ज हैं और करीब 26 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन प्रदेश से जुड़ा पाया गया है। पुलिस द्वारा अब तक तेरह लाख पचास हज़ार रुपये की धनराशि फ्रीज कराई जा चुकी है।

जांच में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस के मुताबिक, खातों को फ्रीज करने की सूचना पहले ही आरोपियों तक पहुंचा दी जाती थी, जिससे वे समय रहते रकम निकाल लेते थे। आरोपियों के मोबाइल से कई व्हाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जिनके जरिए देश-विदेश में फैले नेटवर्क का संचालन होता था। गिरोह के सदस्य कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे—करन का “लिटिल मोंगा” और गुलशन का “कालरा” नाम रखा गया था।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह शेयर ट्रेडिंग, गेमिंग ऐप, हनीट्रैप और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाता था। फिलहाल पुलिस अन्य खातों और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप