4.93 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, विदेशी नेटवर्क से जुड़े तीन शातिर गिरफ्तार
कानपुर, 07 जुलाई (हि.स.)। कल्याणपुर पुलिस ने चार करोड़ तिरानवे लाख रुपये की साइबर ठगी के बहुचर्चित मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह विदेशी साइबर ठगों के लिए भारत में बैंक खाते, सिम कार्ड और तकनीकी मदद उपलब्ध कराता था। मामले में दो अन्य आरोपित अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि जांच के दौरान एनसीआरबी पोर्टल पर एनजीओ के बैंक खातों से जुड़ी 52 शिकायतें मिलीं। जांच में पता चला कि करीब 32 हजार बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। गिरोह ऑनलाइन गेमिंग और निवेश के नाम पर लोगों को जाल में फंसाकर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराता था।
जांच के दौरान सामने आया कि चकेरी निवासी आशीष कुमार सिंह एक संस्था से जुड़े हैं। नवंबर 2025 में उन्हें एक व्यक्ति ने संस्था को डोनेशन दिलाने का झांसा देकर लखनऊ बुलाया। वहां उन्हें बंधक बनाकर मोबाइल छीन लिया गया और उनके फोन पर आने वाले ओटीपी का इस्तेमाल कर संस्था के बैंक खाते से संदिग्ध लेनदेन किए गए। कुछ दिनों तक निगरानी में रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में उन्होंने कल्याणपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
जांच के आधार पर पुलिस ने गोरखपुर निवासी शुभेंद्र प्रकाश मिश्रा उर्फ शुभम मिश्रा, राज सिंह और संतकबीर नगर निवासी राहुल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। जबकि इमरान और सौरभ पांडेय अभी फरार हैं। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे बड़े बैंक खातों की तलाश करते थे और खाते उपलब्ध कराने वालों को 30 प्रतिशत कमीशन देने का लालच देते थे। जांच में अब तक सामने आया कि यह लाेग करीब पांच कराेड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी में संलिप्त हैं, आगे अभी जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार गिरोह के कुछ सदस्य पहले कंबोडिया, थाईलैंड और दुबई में संचालित साइबर फ्रॉड कॉल सेंटरों में काम कर चुके हैं। वहीं उन्होंने ऑनलाइन ठगी के तरीके सीखे और बाद में भारत में अपना नेटवर्क तैयार किया। गिरोह ने एक हजार से अधिक प्री-एक्टिवेटेड सिम दुबई भेजीं, जिनका इस्तेमाल भारतीय नंबरों से लोगों को कॉल और मैसेज करने में किया जाता था।
ठगी का तरीका भी सुनियोजित था। आरोपित पहले सोशल मीडिया पर विज्ञापन भेजते, फिर इच्छुक लोगों को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ते। इसके बाद फर्जी आईडी बनाकर ऑनलाइन गेमिंग और निवेश के जरिए अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता और अंत में उनसे बड़ी रकम ठग ली जाती थी।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से लैपटॉप, 48 सिम कार्ड, एनजीओ खातों से जुड़े दस्तावेज और नकदी बरामद की है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

