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अशोकनगर में साइबर ठगी का अनोखा गिरोह बेनकाब, एआई वीडियो से खुलवाते थे फर्जी खाते

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अशोकनगर में साइबर ठगी का अनोखा गिरोह बेनकाब, एआई वीडियो से खुलवाते थे फर्जी खाते


अशोकनगर में साइबर ठगी का अनोखा गिरोह बेनकाब, एआई वीडियो से खुलवाते थे फर्जी खाते


अशोकनगर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गिरोह आम लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फर्जी वीडियो तैयार करता था। इन वीडियो के जरिए बैंकों की ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया को चकमा देकर फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगों को 8 से 10 हजार रुपये में बेच दिया जाता था। दिलचस्प यह है कि ठगी की रकम के बंटवारे को लेकर गिरोह के सदस्य आपस में ही भिड़ गए और साथियों से वसूली करने के लिए नकली पुलिसकर्मी बन गए।

शुक्रवार को पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के तीन और आरोपियों को ग्राम रुसल्ली से गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से दो वॉकी-टॉकी, दो मोबाइल फोन, 24 हजार रुपये नकद और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

एआई वीडियो से खुलवाते थे फर्जी बैंक खाते

गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी आम लोगों के आधार कार्ड और फोटो हासिल कर एआई तकनीक से उनके बोलते और हिलते-डुलते हुए फर्जी वीडियो तैयार करते थे। इन वीडियो के माध्यम से बैंकों की वीडियो सत्यापन प्रक्रिया को चकमा देकर फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते थे।

खाते खुलने के बाद उनकी पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड गिरोह के सदस्य अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन खातों को 8 से 10 हजार रुपये में साइबर ठगों को बेच दिया जाता था। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाली साइबर ठगी की रकम इन्हीं खातों के माध्यम से स्थानांतरित की जाती थी।

ठगी की रकम के बंटवारे पर विवाद, साथियों को लूटने की साजिश

गिरोह की गतिविधियों का खुलासा तब हुआ, जब साइबर ठगी से मिली रकम के लेन-देन और बंटवारे को लेकर सदस्यों में विवाद हो गया। इसके बाद आरोपियों ने आगरा निवासी राजू और रंजीत यादव को ही निशाना बनाने की योजना बनाई।

आरोपियों ने कथित तौर पर नकली पुलिसकर्मी बनकर वसूली की साजिश रची। इसके लिए वे वॉकी-टॉकी और पुलिस का मोनो लगी कार लेकर पहुंचे और दोनों को पकड़ने का नाटक किया। गिरफ्तारी और मारपीट का डर दिखाकर पहले 30 लाख रुपये मांगे गए। बाद में 20 लाख रुपये में सौदा तय कर रकम मंगाने की तैयारी की गई। हालांकि, कथित वसूली की रकम हाथ लगने से पहले ही नईसराय पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया।

तीन और गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

एसपी राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, संदिग्ध बैंक खातों, अंतरराज्यीय नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।

पुलिस को आशंका है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यह कार्रवाई एसपी राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में नईसराय थाना प्रभारी उपनिरीक्षक आशुतोष गुप्ता के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने की।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार