धमतरी में अनोखा शक्तिपीठ पंडाल, एक ही जगह श्रीलंका से पाकिस्तान तक की देवियों के दर्शन
जालमपुर की बालवीर दुर्गा उत्सव समिति की अनूठी पहल, 35 वर्षों से कर रही मां दुर्गा की आराधना
धमतरी, 17 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्रि पर्व पर धमतरी के जालमपुर स्थित बालवीर दुर्गा उत्सव समिति का अनोखा शक्तिपीठ पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां एक ही स्थान पर श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, तिब्बत, पाकिस्तान और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित शक्तिपीठों की झांकियों के दर्शन हो रहे हैं। धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक वातावरण और आकर्षक साज-सज्जा से सजे इस पंडाल को देखने के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
यहां पंडाल को गुफानुमा स्वरूप दिया गया है। प्रवेश द्वार पर माता सती की कथा और शक्तिपीठों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को दर्शाते पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि भीतर अलग-अलग शक्तिपीठों की आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। प्रत्येक झांकी के ऊपर लगाए गए बैनर में संबंधित शक्तिपीठ का नाम, स्थान और धार्मिक महत्व बताया गया है। यहां श्रीलंका की मां शंकरी देवी, नेपाल की मां गुह्येश्वरी, बांग्लादेश की मां जेसोरेश्वरी, तिब्बत की मां मानसा, पाकिस्तान की मां हिंगलाज देवी और तेलंगाना की मां जोगुलम्बा सहित विभिन्न शक्तिस्थलों से जुड़ी झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। पंडाल के अंतिम हिस्से में ब्रह्मांड की थीम पर विशेष सजावट की गई है। यहां कमल पुष्प पर विराजित मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
कलात्मक सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी के बीच माता का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह पंडाल धार्मिक दर्शन के साथ विभिन्न शक्तिपीठों के इतिहास और महत्व को जानने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। बालवीर दुर्गा उत्सव समिति पिछले 35 वर्षों से नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर आराधना करती आ रही है। समिति के सदस्य हर वर्ष कुछ नया करने का प्रयास करते हैं। पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों की आराध्य देवियों की झांकियां प्रस्तुत की गई थीं, जबकि इस बार देश-विदेश में स्थित सात शक्तिपीठों को एक साथ प्रदर्शित करने की परिकल्पना साकार की गई है। इस अनूठे पंडाल की तैयारी में करीब एक वर्ष का समय लगा। समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को मां के विभिन्न शक्तिस्थलों के दर्शन कराने के साथ उनके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना है। यही वजह है कि यह पंडाल नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

