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हिरोली बैठक में डिपॉजिट-13 से लौह अयस्क सैंपल भेजने पर ग्रामीणों ने किया विराेध

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हिरोली बैठक में डिपॉजिट-13 से लौह अयस्क सैंपल भेजने पर ग्रामीणों ने किया विराेध


दंतेवाड़ा, 27 सितंबर (हि.स.)। जिले के बैलाडीला के डिपॉजिट-13 नंदराज पहाड़ में लौह अयस्क का सैंपल निकाले जाने और उसे नगरनार भेजे जाने की जानकारी के बाद ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को हिरोली गांव में आस-पास के कई गांवों के ग्रामीण जुटे और मौजूदा गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि डिपॉजिट-13 की 2017 की ग्रामसभा को जांच के बाद शून्य माना जा चुका है।

बैठक में ग्रामीणों ने नगरनार भेजे गए लौह अयस्क के सैंपल को लेकर जानकारी जुटाने पर चर्चा की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह सिर्फ सैंपल की प्रक्रिया है, तब भी इसकी अनुमति, आदेश और परिवहन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होने चाहिए। ग्रामीण प्रशासन से ग्रामसभा के प्रस्ताव, खनन पट्टे, वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां, पेड़ कटाई की अनुमति और अयस्क के परिवहन से जुड़े आदेश की जानकारी मांगने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने तय किया है कि 02 अक्टूबर को प्रस्तावित विशेष ग्रामसभा में डिपॉजिट-13 का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसमें पुराने ग्रामसभा रिकॉर्ड के साथ मौजूदा गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी लेने और आगे की रणनीति तय करने पर चर्चा होगी।

इसके बाद नई ग्रामसभा कब और किसकी मौजूदगी में हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूछा है कि अगर नई ग्रामसभा की अनुमति नहीं हुई है तो नंदराज पहाड़ से लौह अयस्क का सैंपल निकालने और उसे नगरनार भेजने की अनुमति किसने दी। इसके साथ ही पहाड़ पर पेड़ों की कटाई शुरू होने को लेकर भी ग्रामीणों ने दस्तावेज और आदेश सार्वजनिक करने की मांग की है।

डिपॉजिट-13 को लेकर विवाद की शुरुआत साल 2017 में हुई ग्रामसभा से जुड़ी है। हिरोली में हुई ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर खदान का ठेका निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन ने इसकी जांच कराई थी। जांच में ग्रामसभा की कार्रवाई में ऐसे लोगों के नाम और हस्ताक्षर मिलने की बात सामने आई थी, जिनकी मौत बैठक से पहले हो चुकी थी। कुछ ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को लेकर भी बाद में दिए गए शपथपत्रों से विरोधाभास सामने आया था। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की प्रक्रिया और बैठक से पहले सदस्यों को सूचना देने के नियमों के पालन पर भी सवाल उठे थे। तत्कालीन सरपंच ने ऐसी ग्रामसभा होने से ही इनकार किया था।

प्रशासनिक जांच के बाद 2017 की ग्रामसभा के प्रस्ताव और उससे जुड़ी प्रक्रिया को शून्य माना गया था। वन स्वीकृति से जुड़े मामले में भी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बाद डिपॉजिट-13 को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया के खिलाफ ग्रामीणों ने आंदोलन किया था। अब उसी पुराने रिकॉर्ड को लेकर ग्रामीण मौजूदा गतिविधियों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि 2017 की ग्रामसभा शून्य हो चुकी है तो मौजूदा समय में खनन क्षेत्र में किसी भी गतिविधि से पहले नई ग्रामसभा और वैधानिक अनुमति की जानकारी ग्रामीणों को दी जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि नंदराज पहाड़ उनके लिए सिर्फ खनिज भंडार नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा पहाड़ है। इसलिए ग्रामसभा की जानकारी और वैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट किए बिना यहां किसी भी तरह की खनन गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे