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छग :हल्दी बीज वितरण में हुए कथित 10 करोड़ की भ्रष्टाचार की शिकायतों पर उच्चस्तरीय जांच शुरू

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छग :हल्दी बीज वितरण में हुए कथित 10 करोड़ की भ्रष्टाचार की शिकायतों पर उच्चस्तरीय जांच शुरू


रायपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना (2026-27) के अंतर्गत हल्दी बीज वितरण में हुए कथित ₹10 करोड़ की सब्सिडी और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के कड़े निर्देश के बाद आज संचालनालय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव को बिंदुवार विस्तृत जांच कर जल्द वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

नियमों के अनुसार हल्दी बीज 9 महीने तक उपयोग के योग्य होते हैं, लेकिन आरोप है कि एक्सपायरी डेट बीत जाने के साल भर बाद पुराने व अमानक बीजों की सप्लाई की गई। प्रदेश के जगदलपुर, कोंडागांव, धमतरी, बिलासपुर, और अंबिकापुर जैसे कई जिलों के किसानों ने शिकायत की है कि उन्हें कोई बीज नहीं मिला, फिर भी लाभार्थी सूची में उनके नाम जोड़ दिए गए।

हॉर्टिकल्चर विभाग के कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बीजों और बिलों का भौतिक सत्यापन किए बिना ही एक ही एजेंसी को फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान कर दिया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तय मानक दरों के विपरीत कम गुणवत्ता वाले बीज ऊंची दरों पर सप्लाई दिखाने का आरोप है। जांच के लिए संचालनालय स्तर से टीम भी गठित की गई है। जिलों में हल्दी बीज वितरण से संबंधित शिकायतों के बाद संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा जिला अधिकारियों से हितग्राहीवार जांच शुरू की गई है।

दरअसल, हार्टिकल्चर विभाग ने किसानों को डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी वाले हल्दी और अदरक के बीज आपूर्ति करने की योजना बनाई। यह पूरी योजना के तहत प्रदेशभर में 25 करोड़ रुपये में 2076 हेक्टेयर में हल्दी और अदरक की खेती करवानी थी। जिसके लिए 10 एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बीज मुहैया करवाने का दावा किया गया।

सूत्रों के अनुसार बीरगांव की एक ही एजेंसी ने रायपुर से लेकर कोंडागांव, बीजापुर, जगदलपुर सहित कई जिलों में सप्लाई की। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी कृषि विवि की ओर से मानक हल्दी के बीज की कीमत 70 रुपये प्रति किलो के करीब है, लेकिन उक्त एजेंसी द्वारा 46 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज की सप्लाई की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता के बीज तो मिल ही नहीं सकते। बिना जीआई टैग वाले अमानक बीजों की आपूर्ति किसानों को कर के 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी बिना सत्यापन के ही ले ली गई थी।

इस पर संज्ञान लेते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने जांच के आदेश दिए थे। जिसके परिपालन में गठित कमेटी द्वारा रोपित बीज की मात्रा, बीज प्रदायक संस्थाओं द्वारा प्रदाय बीज की मात्रा एवं गुणवत्ता और हल्दी बीज रोपण करने वाले कृषकों को भुगतान की गई अनुदान राशि की स्थिति सहित आवश्यक जानकारी और अभिलेख मांगे गए हैं।

जांच प्रक्रिया के अंतर्गत किसानों के खेतों में रोपित हल्दी फसल की वास्तविक स्थिति, रोपित रकबा का सत्यापन करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही बीज वितरण से संबंधित अभिलेखों, बीज प्रदायक संस्थाओं के विवरण, देयकों, पंजीयन टैग तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी का परीक्षण किया जाएगा। किसानों के खेतों में रोपित फसल के जीपीएस आधारित फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके। वहीं, कृषकों द्वारा रोपित हल्दी फसल के प्रमाणित बीज वितरण से संबंधित शिकायतों एवं सत्यापन की प्रक्रिया को देखते हुए अनुदान भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है। पूरी जांच प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन के बाद ही भुगतान पर निर्णय लिया जाएगा।

कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसारजगदलपुर,कोंडागांव,धमतरी,राजनंदगांव,दुर्ग,बिलासपुर,अंबिकापुर,बलरामपुर,जशपुर,महासमुंद जिलों में सबसे ज्यादा फ़र्जीवाड़ा सामने आया है। इन जिलों में असिस्टेंट और डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चरस्तर के अधिकारियों ने एक ही संस्था से फर्जी बिल लेकर बग़ैर परीक्षण भुगतान सुनिश्चित करने में देरी नहीं की।

कृषि मंत्री के आदेशानुसार गठित विशेष जांच टीम हल्दी बीज के प्रमाणीकरण, टैग, लॉट नंबर और एक्सपायरी डेट की बारीकी से जांच करेगी ।वास्तव में किस किसान ने कितनी भूमि पर हल्दी लगाई है, इसके सत्यापन के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जा रहा है।क्या किसानों को निर्धारित मात्रा में सामग्री मिली और क्या भुगतान नियमों के अनुरूप किया गया, इसकी पूरी वित्तीय ऑडिट होगी।

कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर दोषी अधिकारियों और संबंधित सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा