नहलाते समय दो साल के बच्चे की आंख के पलक में फंसी जीभी
धमतरी, 14 मई (हि.स.)। घर में नहलाते समय दो साल के एक बच्चे की आंख के पलक में अचानक जीभी (टंग क्लीनर) फंस गया। इससे बच्चा घायल होकर रोने लगा। इस घटना से बच्चे की मां समेत स्वजन में हड़कंप मच गया। एंबुलेंस से उन्हें उपचार के लिए तत्काल जिला अस्पताल धमतरी लाया गया। यहां बच्चे की गंभीर हालत व आंख को सुरक्षित बचाने के लिए नेत्ररोग विशेषज्ञ डा जेएस खालसा ने तत्काल आपरेशन कर जीभी को बाहर निकाला, तब जाकर बच्चा व स्वजन ने राहत की सांस ली।
वनांचल नगरी ब्लाक अंतर्गत ग्राम कसपुर निवासी कृष्ण कुमार दो वर्ष पुत्र जगदीश नेताम को गुरुवार की सुबह उनकी मां नहला रही थी। इस दौरान बच्चा जीभी को खेल रहा था, तभी कृष्ण के पलक में जीभी फंस गया और बच्चा रोने लगा। इस घटना को देखकर उनकी मां भी हड़बड़ा गई। स्वजन को घटना की जानकारी दी और बच्चे की इस हालत को देखा, तो उनमें हड़कंप मच गया। स्वजन तत्काल 108 एम्बुलेंस को बुलाकर घायल बच्चा को उपचार के लिए जिला अस्पताल धमतरी लाया। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ डा जेएस खालसा ने बच्चा के आंख के पलक में फंसे जीभी को देखने के बाद बच्चा के आंख को बचाने तत्काल आपरेशन कक्ष में ले गए और कुछ ही मिनट में उसके पलक से जीभी को बाहर निकाल कर सफलतापूर्वक आपरेशन किया। आपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित है। डा जेएस खालसा ने कहा कि बच्चा खेलते वक्त अपने आंख में जीभी को लगा लिया होगा। आंख पूरी तरह सुरक्षित है। दवाइयां दे दी गई है। करीब 10 दिनों में पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही जिला अस्पताल में एक बच्चा के आंख में मां के ब्लाउज का हुक आंख के पलक में फंसा हुआ आया उपचार के लिए आया था, इसे भी आपरेशन करके बाहर निकाला गया।
आपरेशन करने वाले जिला अस्पताल के पूर्व नेत्ररोग विशेषज्ञ डा जेएस खालसा ने बताया कि, उन्होंने अपने चिकित्सकीय कार्यकाल के दौरान करीब 100 से अधिक केस ऐसे देखे हैं जहां मां अपने नवजात शिशु को जब दूध पिलाती है एवं उसके ब्लाऊज में हुक लगी रहती है, इससे कभी-कभी शिशु हड़बड़ा कर सिर हिला देता है, तो ब्लाऊज का हुक निचली पलक में फंस कर पलक को फाड़ देता है। जब हुक फंसता है तब शिशु और जोर से सिर हिलाता है। आखों की चिकनाई के लिए आंसू लगातार बनते हैं एवं पलकों के सहारे चल कर आंसू की नली से अंदर चले जाते हैं। यह प्रक्रिया पुतली को सूखने नही देती एवं आखें चिकनी एवं चमकदार बनी रहती है। हुक या किसी भी वस्तु से आंख के निचली पलक में लगी चोट से पलकों की संरचना को बिगाड़ देती है, जिससे मरीज को लगातार आंसू बहने की शिकायत रहती है। निचली पलक फटने पर प्लास्टिक आपरेशन ही उसका समाधान है, जो कि बेहद मंहगी होती है। उन्होंने शिशुवती माताओं से अपील करते हुए कहा कि अपने ब्लाऊज में हुक की जगह बटन लगाएं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

