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इंद्रावती टाइगर रिजर्व में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा

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इंद्रावती टाइगर रिजर्व में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा


जगदलपुर, 21 सितंबर (हि.स.)। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बस्तर एवं कोंडागांव में पिछले एक वर्ष से बाघों की मौजूदगी दर्ज होने के बीच इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सात-आठ बाघ होने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन तीन जिलों में लगातार दिखाई दे रहे बाघ एक ही है या अलग-अलग, इसे लेकर वन विभाग अभी पुख्ता निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।

बाघों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखने और वैज्ञानिक तरीके से डाटा जुटाने के लिए अब प्रत्येक संबंधित वनमंडल में वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) की प्रत्यक्ष निगरानी में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। वन अधिकारियों को निगरानी के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण पांडेय ने साेमवार काे बताया कि बाघ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है, विभाग ने बाघों की लोकेशन सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। पुख्ता सूचना के लिए स्थानीय सूचना तंत्र विकसित करने और सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसी को देखते हुए संभाग के सातों जिलों के वन अधिकारियों को केवल निगरानी तक सीमित न रहकर सुरक्षा, संघर्ष की रोकथाम, वैज्ञानिक डाटा संग्रहण और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

अब प्रत्येक संबंधित वनमंडल में वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) की प्रत्यक्ष निगरानी में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। वहीं सभी परिक्षेत्र अधिकारियों एवं बीट अधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर वन्यप्राणी वृत्त कार्यालय से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। बाघ द्वारा पालतू पशुओं के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन अमले को तुरंत मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना होगा। वन्यप्राणी की पहचान पुख्ता प्रमाणों के आधार पर होने पर मुआवजा प्रकरण तत्काल तैयार कर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे