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सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान बना जनजातीय अंचलों की नई उम्मीद

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सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान बना जनजातीय अंचलों की नई उम्मीद


सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान बना जनजातीय अंचलों की नई उम्मीद


धमतरी, 25 मई (हि.स.)।दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया “जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान जिले में जनविश्वास और जनसहभागिता का मजबूत माध्यम बनकर उभरा। 18 से 25 मई तक आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के दौरान प्रशासन ने गांव-गांव पहुंचकर न केवल समस्याएं सुनीं, बल्कि मौके पर उनका समाधान भी किया।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत चिन्हित 121 ग्रामों की 133 बसाहटों तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के 108 गांवों में यह विशेष अभियान संचालित किया गया। अभियान का उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना और जनसुनवाई के माध्यम से समस्याओं का त्वरित निराकरण करना रहा। अभियान के तहत आदि सेवा केंद्रों में 21 से 23 मई तक विशेष जनसुनवाई शिविर लगाए गए। इन शिविरों में राशन कार्ड, पेंशन और मनरेगा से जुड़े मामलों का तत्काल निराकरण किया गया। मौके पर 50 राशन कार्ड, 20 पेंशन तथा 20 मनरेगा प्रकरणों का समाधान किया गया।

स्वास्थ्य और जनकल्याण सेवाओं को लेकर भी अभियान प्रभावी रहा। मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्वास्थ्य टीमों ने गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण, सिकल सेल जांच, टीबी स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए। इस दौरान 315 आधार कार्ड, 250 आयुष्मान कार्ड, 100 जनधन खाते तथा 150 लोगों को जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा गया। वहीं 500 हितग्राहियों की सिकल सेल एवं टीबी जांच की गई। इसके अलावा 30 पेंशन और 70 राशन कार्ड संबंधी मामलों का निराकरण भी किया गया।

अभियान के दौरान हितग्राही संवाद, फील्ड निरीक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी गई। जिला प्रशासन ने जनपद पंचायत धमतरी, नगरी, कुरूद और मगरलोड के अधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।

जनजातीय गरिमा उत्सव में जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोककला की आकर्षक झलक भी देखने को मिली। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जनजागरूकता कार्यक्रमों में विशेष पिछड़ी जनजाति कमार सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और मीडिया प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और गरिमामय बना दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा