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मिथ्या छाप बेसन पर जुर्माना, अमानक पनीर और एफआरके भी जांच में फेल

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मिथ्या छाप बेसन पर जुर्माना, अमानक पनीर और एफआरके भी जांच में फेल


धमतरी, 23 जुलाई (हि.स.)। धमतरी जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्रवाई शुरू हो गई है। विभागीय जांच में मिथ्या छाप (मिसब्रांड) बेसन बेचने के मामले में कंपनी और रिटेलर पर कुल 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं पनीर तथा फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) के नमूने भी जांच में फेल पाए गए हैं। इन मामलों में नियमानुसार न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग धमतरी की टीम ने निरीक्षण के दौरान देव किराना कंडेल से मन्नत बेसन का नमूना लिया था। प्रयोगशाला जांच में यह उत्पाद मिथ्या छाप (मिसब्रांड) पाया गया। जांच में सामने आया कि पैकेजिंग पर कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि उत्पाद चने का बेसन है। इसके बजाय पैकेट पर चावल, तुवर दाल और मसूर दाल का उल्लेख किया गया था, जिससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की संभावना थी।

मामले में न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित दुर्ग की कंपनी पर 25 हजार रुपये एवं रिटेलर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसी क्रम में गंगरेल स्थित बरदिहा रिसार्ट से पनीर और दही के नमूने लिए गए थे। जांच रिपोर्ट में पनीर का नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, वहीं दही का नमूना मानक के अनुरूप मिला। पनीर के मामले में संबंधित प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। मामले में निर्णय आना शेष है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी फनेश्वर पिथौरा ने बताया कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) चावल के आटे में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाकर तैयार किए जाते हैं।उन्होंने बताया कि कुरूद के अग्रबंधु इंडस्ट्रीज, सिद्धार्थ एग्रो और केशर राइस मिल से लिए गए एफआरके के नमूने प्रयोगशाला जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच रिपोर्ट में इनमें आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। इस संबंध में संबंधित मामलों के विरुद्ध नियमानुसार न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया गया है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय के अनुसार की जाएगी।

अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। मिथ्या छाप और अमानक खाद्य पदार्थों के मामलों में नियमानुसार न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए नियमित रूप से निरीक्षण, नमूना संग्रह और जांच की जा रही है। आगे भी नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माता, विक्रेता एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि खाद्य सामग्री खरीदते समय पैकेजिंग पर अंकित बैच नंबर, विनिर्माण तिथि, अवसान तिथि एवं लेबल संबंधी जानकारी अवश्य जांचें और मानक उत्पाद ही खरीदें।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा