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छुट्टी के बाद स्कूल में घंटों कैद रही पहली की छात्रा, रात में ताला तोड़कर ग्रामीणों ने बचाया

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छुट्टी के बाद स्कूल में घंटों कैद रही पहली की छात्रा, रात में ताला तोड़कर ग्रामीणों ने बचाया


स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर, प्रधानपाठक से जवाब-तलब, डीईओ ने गठित की जांच टीम

धमतरी, 12 जुलाई (हि.स.)। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के पीएमश्री प्राथमिक शाला कठौली में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्कूल की छुट्टी के बाद कक्षा पहली की एक मासूम छात्रा को कक्षा के भीतर ही छोड़कर विद्यालय में ताला जड़ दिया गया। कई घंटे तक बच्ची स्कूल के कमरे में भूखी-प्यासी और डरी-सहमी कैद रही।

देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात में विद्यालय परिसर से बच्ची के रोने और मदद के लिए पुकारने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और ताला तोड़कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है और विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार 10 जुलाई को विद्यालय की नियमित छुट्टी के बाद शिक्षक स्कूल में ताला लगाकर चले गए, लेकिन किसी ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि सभी बच्चे सुरक्षित घर के लिए निकल चुके हैं। इसी दौरान कक्षा पहली की छात्रा किसी कारणवश कमरे के भीतर ही रह गई और बाहर से ताला लग जाने के कारण घंटों तक वहीं कैद रही। बच्ची लगातार आवाज लगाती रही, लेकिन तब तक विद्यालय परिसर पूरी तरह सुनसान हो चुका था। उधर शाम तक बेटी के घर नहीं पहुंचने से परिजन परेशान हो उठे और रिश्तेदारों, सहपाठियों व आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश शुरू कर दी। रात के समय विद्यालय परिसर से रोने और सहायता के लिए पुकारने की आवाज सुनाई देने पर ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। जब उन्होंने स्कूल पहुंचकर देखा तो मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। तत्काल ग्रामीणों ने ताला तोड़ा और कक्षा का दरवाजा खोलकर छात्रा को बाहर निकाला। कई घंटे तक बंद रहने के कारण बच्ची भयभीत और सहमी हुई थी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उसकी आवाज किसी ने नहीं सुनी होती तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय प्रबंधन पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय पूरे मामले का दोष स्कूल के सफाई कर्मचारी (स्वीपर) पर मढ़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि स्वीपर अपनी ड्यूटी पूरी कर पहले ही घर जा चुका था। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विद्यालय बंद करने से पहले प्रत्येक कक्षा का निरीक्षण करना और यह सुनिश्चित करना कि कोई भी बच्चा परिसर में न रह जाए, यह प्रधानपाठक और शिक्षकों की मूल जिम्मेदारी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए जांच टीम गठित कर दी है। प्रथम दृष्टया घटना को गंभीर मानते हुए स्थानीय नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है तथा संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने भी प्रधानपाठक से जवाब-तलब किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इधर ग्रामीणों ने भी जिम्मेदार शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है, इसलिए दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा