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अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह मां दंतेश्वरी मंदिर में कराेड़ाें के चढ़ावे में गड़बड़ी की प्रबल संभावना : उमाशंकर शुक्ला

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अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह मां दंतेश्वरी मंदिर में कराेड़ाें के चढ़ावे में गड़बड़ी की प्रबल संभावना : उमाशंकर शुक्ला


जगदलपुर, 18 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ कांग्रेस कमेटी रायपुर के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने आज शनिवार काे प्रेस विज्ञिप्त जारी करते हुए बताया कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर में पिछले चार दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक मंदिर की कुल संपत्ति, प्राप्त चढ़ावे, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य दान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसे लेकर अब शहर में चर्चा तेज हो गई है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह यहां भी कराेड़ाें के चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका ही नहीं प्रबल संभावना है।

जबकि वर्ष 2020 में अदालत ने मंदिर की संपत्ति का ब्यौरा जल्द से जल्द सार्वजनिक करने का आदेश भी दिया गया था, बावजूद इसके पिछले चार दशक से मंदिर की कुल संपत्ति, प्रति वर्ष प्राप्त चढ़ावे की राशि, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य दान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्हाेंने कहा कि टेम्पल कमेटी जिसके लगभग सभी सदस्याें की मृत्यु हाे जाने के बाद जिला प्रशासन उस मंदिर कमेटी की आड़ में वहां तैनात तहसीलदार जगदलपुर के पास मंदिर के चढ़ावे का पूरा हिसाब हाेने के बावजूद चढ़ावे-दान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया जाना प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्हाेंने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तरह मां दंतेश्वरी मंदिर में चाेरी काे प्रश्रय नहीं दिया सकता है। प्रशासनिक स्तर पर जल्द संज्ञान लेकर प्रति वर्ष अद्यतन रिकॉर्ड सार्वजनिक किेये जाने की व्यवस्था की जाए, अन्यथा कांग्रेस श्रद्धालुओं के साथ बैठकर आगे की कार्रवाई के लिए अग्रसर हाेगी।

उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, लेकिन मंदिर की संपत्ति को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका स्पष्ट जवाब प्रशासन के पास भी नहीं दिख रहा। वर्ष 1981 के बाद से मंदिर की संपत्ति का सत्यापन नहीं हुआ। वर्ष 2020 में न्यायालय ने 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश दिया था, लेकिन वर्षों बाद भी न तो जांच पूरी होने की जानकारी सामने आई और न ही संपत्ति का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर देरी की वजह क्या है? यही कारण है कि मां दंतेश्वरी का मंदिर में कई करोड़ों के गड़बड़ी की आशंका काे प्रबल संभावना में तब्दील करता है।

उन्हाेंने कहा कि मां दंतेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। दशकों से यहां श्रद्धालु सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, हार, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं देवी को अर्पित करते आ रहे हैं। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी संपत्ति का चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मंदिर के खजाने का अद्यतन और सार्वजनिक हिसाब सामने नहीं आया है।इतना ही नही टेम्पल कमेटी के पास कुल 22 मंदिराें की अचल संपत्ति किन हालाताें में हैैैैै, एवं उससे मिलने वाले आय का भी ब्याेरा के साथ अद्यतनरिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है। उन्हाेंने कहा कि मां दंतेश्वरी मंदिर में प्रति वर्ष चढ़ावे में अनुमानित राशि दान पेटी से 15 से 20 लाख रूपये नगद एवं ज्याेति-कलश से 35 से 40 लाख रूपये के आने की बात कही गई है। चार दशक से हिसाब सार्वजनिक नहीं किये जाने से अब मंदिर से जुड़े कई लोग और श्रद्धालु इस विषय पर सवाल उठा रहे हैं।

उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि मंदिर की संपत्ति किसी व्यक्ति या विभाग की नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की धरोहर मानी जाती है, ताे सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अदालत के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? मंदिर के चढ़ावे-दान की नगद राशि एवं साेने-चांदी का प्रति वर्ष अद्यतन रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? जब अदालत का आदेश भी वर्षों तक फाइलों में दबा रह जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्हाेंने कहा कि पूर्व में गठित मांदंतेश्वरी मंदिर के ज्याेति-कलश समिति के द्वारा ज्याेति-कलश से मिलने वाले राशि का प्रतिवर्ष आय-व्यय का ब्याेरा सार्वजनिक किया जाता रहा, जिसे भी टेम्पल कमेटी की आड़ में अपने अधीन कर लिया गया, जिसके बाद से इसका भी आय-व्यय का ब्याेरा सार्वजनिक हाेना बंद हाे गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे