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कोरबा: औद्योगिक इकाइयों और पावर प्लांट में सुरक्षा नियमों के सख्त पालन के निर्देश

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कोरबा: औद्योगिक इकाइयों और पावर प्लांट में सुरक्षा नियमों के सख्त पालन के निर्देश


कोरबा, 25 अप्रैल (हि. स.)। जिले में औद्योगिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में आज शनिवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों और पावर प्लांट्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अपर कलेक्टर ओंकार यादव ने सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतरई में हाल ही में हुई दुर्घटना का हवाला देते हुए सभी उद्योगों को सतर्क रहने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अपर कलेक्टर यादव ने कहा कि, कोरबा एक प्रमुख औद्योगिक जिला है, इसलिए यहां सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण, मशीनें और संसाधन उपलब्ध होना चाहिए और उनका नियमित रूप से सही संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने के लिए उद्योगों को सभी आवश्यक सावधानियां अपनानी होंगी।

बैठक में औद्योगिक प्रतिष्ठानों और पावर प्लांट्स में मौजूद सुरक्षा कमियों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए। अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, मशीनों का सुरक्षित संचालन, उपकरणों का नियमित रखरखाव, बॉयलर सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। दुर्घटना की स्थिति में रेड, ग्रीन और येलो जोन निर्धारित करने के साथ ही आपातकालीन संपर्क नंबरों को कार्यस्थल पर प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।

औद्योगिक इकाइयों में तकनीकी प्रक्रियाओं की निरंतर निगरानी को अनिवार्य बताया गया। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए एएसपी, डस्ट कलेक्शन सिस्टम, फिल्टर और जल छिड़काव जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से लागू करने पर बल दिया गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि कलेक्टर ने वाहन चालकों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की आंखों की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। इसके लिए उद्योगों को स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर कर्मचारियों की जांच सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधरोपण करने के निर्देश भी दिए गए।

उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विजय सिंह पोटाई ने प्रस्तुति के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सतर्क रहना आवश्यक है। मॉक ड्रिल के जरिए आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने पीपीई किट, हेलमेट, सुरक्षा जूते, ऊंचाई पर कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरण, मशीन संचालन, फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल और केमिकल सुरक्षा, ड्राइवर सेफ्टी, हीट स्ट्रेस प्रबंधन, आपातकालीन नियंत्रण, ओवरहेड क्रेन सुरक्षा, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस कीपिंग और सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति जैसे सभी जरूरी सुरक्षा मानकों पर विस्तार से जानकारी दी।

आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वाज ने जिले में डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार करने, आपात स्थिति में बचाव कार्यों, संचार व्यवस्था और स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दूसरों की मदद करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उद्योगों को सुरक्षा मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करने के निर्देश दिए।

उद्योग विभाग के अधिकारी विजय कारे ने नई औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी देते हुए उद्योगों को सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। श्रम अधिकारी नितीश विश्वकर्मा ने श्रमिकों के वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी लाभ और दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी।

बैठक में एनटीपीसी, बालको, एसईसीएल, अडानी, सीएसईबी, इंडियन ऑयल और मारुति सहित जिले के सभी प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी