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उच्च शिक्षा विभाग ने की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने पहल

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उच्च शिक्षा विभाग ने की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने पहल


-राज्य के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक विशेष सेल का गठन होगा

रायपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (नेप -2020) के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था तैयार करने की पहल की है। इस सबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आज (शुक्रवार) को नवा रायपुर के मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित की गई थी।

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह तय किया गया है कि राज्य के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक विशेष नेप सेल का गठन किया जाएगा। यह सेल कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के नियमों को सुचारू रूप से लागू करने और उसकी निगरानी करने का काम करेगा।। मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली बैठक में प्रत्येक विश्वविद्यालय में नेप सेल बनाने, एक नोडल अधिकारी और दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और बीएड कॉलेजों के संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी जरूरी कदम उठाने को कहा। बैठक में नई शिक्षा नीति लागू करने के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर चर्चा हुई। खास तौर पर क्रेडिट सिस्टम और विषय चयन को लेकर सामने आई उलझनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

पिछले दो वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के दौरान सामने आई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। मंत्री टंक राम वर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में हर शैक्षणिक सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। इनमें प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को नीति के प्रावधानों, क्रेडिट सिस्टम और विषय चयन की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही संभाग और जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की योजना है।

बैठक में विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जनरल इलेक्टिव विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य विषय चयन और परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों को कम करना है। साथ ही पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए गए। इसमें भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत से जुड़े विषयों पर जोर रहेगा। देसीउत्पाद खोजें

विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से छठे सेमेस्टर में लागू अनिवार्य इंटर्नशिप व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को इसकी तैयारियां पहले से शुरू करने और उद्योगों तथा व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उद्योगों से जुड़ाव बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बैठक में उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के माध्यम से विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराने तथा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति औरनेप -2020 के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह समिति अपर संचालक और कुलपतियों के समन्वय से काम करेगी। इसका उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था की निगरानी करना और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर नजर रखना है। इतिहासजानें

बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री टंक राम वर्मा ने प्रदेश में बीएड कॉलेजों के संचालन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र विश्वविद्यालयों और ‘बी++’ ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों से बीएड संचालन के लिए मिले आवेदनों पर बिना देरी के कार्रवाई की जाए।

दावा है कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों को बदलकर पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक, लचीला और रोजगार-उन्मुख बनाया जा रहा है।छात्रों को पढ़ाई के बीच में ब्रेक लेने और दोबारा वहीं से शुरुआत करने की सुविधा (क्रेडिट सिस्टम के तहत) बेहतर ढंग से मिल सकेगी।उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्कूली स्तर पर भी स्थानीय बोलियों और कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि इन फैसलों से छत्तीसगढ़ के लाखों छात्रों को वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा