जैविक खेती, नैनो उर्वरक और फसल विविधीकरण से लौट रही जमीन की उर्वरा शक्ति
धमतरी, 14 जून (हि.स.)। धान का कटोरा कहे जाने वाले धमतरी जिले में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नई तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयासों से मिट्टी के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया जा रहा है। संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती को बढ़ावा, नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों का प्रयोग तथा फसल विविधीकरण जैसे उपायों ने कृषि भूमि की घटती उर्वरा शक्ति को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में 10 हजार मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 9 हजार 925 नमूनों की जांच पूरी की जा चुकी है तथा 9 हजार 900 किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं। इन कार्डों के माध्यम से किसानों को अपनी भूमि में उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, बोरॉन और सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल रही है। इसके परिणामस्वरूप किसान वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार आवश्यक मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक प्रयोग में कमी आई है। कलेक्टर अविनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित फसल चक्र एवं संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के सकारात्मक परिणाम अब खेतों में दिखाई देने लगे हैं। जिले में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सहकारी समितियों और कृषि आदान केंद्रों के माध्यम से किसानों को इन उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जा रही है। किसान अब गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और अन्य जैविक विकल्पों को अपनाने लगे हैं, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बन रही है। वहीं, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए नीलहरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विकासखंड कुरूद के ग्राम मरौद स्थित बीज प्रसंस्करण केंद्र में इसका उत्पादन किया जा रहा है, जहां से किसानों को 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चार किलोग्राम का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उपयोग मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने और पीएच स्तर को संतुलित रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। दूसरी ओर, कृषक उन्नति योजना के तहत दलहन, तिलहन और मक्का जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक की आदान सहायता दी जा रही है, जिससे फसल विविधीकरण को गति मिली है। इससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पुनर्स्थापित होने का अवसर मिलने के साथ कृषि में जैव विविधता भी बढ़ रही है।
कृषि विभाग का मानना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती, नैनो तकनीक और फसल विविधीकरण के समन्वित प्रयासों से धमतरी जिला टिकाऊ एवं संतुलित कृषि मॉडल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

