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एकलव्य आवासीय विद्यालय की शिफ्टिंग बनी मुसीबत, छात्रावास खाली कराने पहुंचे डीईओ तो रोने लगीं छात्राएं

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एकलव्य आवासीय विद्यालय की शिफ्टिंग बनी मुसीबत, छात्रावास खाली कराने पहुंचे डीईओ तो रोने लगीं छात्राएं


जगदलपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। बस्तर में स्कूली बच्चों की पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर उपजा विवाद अब भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गया है। दरअसल लोहण्डीगुड़ा के गढ़िया में मौजूद एकलव्य विद्यालय की अस्थायी शिफ्टिंग भानपुरी के बेसुली एजुकेशन हब में कर दी गई है, लेकिन यहां कन्या छात्रावास में जगह की कमी होने की वजह से छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

एकलव्य विद्यालय की छात्राओं और एजुकेशन हब के कन्या परिसर के छात्राओं के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। इसकी जानकारी मिलने पर आज शुक्रवार काे मौके पर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के सामने कन्या परिसर की बच्चियां फूट-फूट कर रोने लगीं। इन बच्चों को रोता देख मौके पर मौजूद परिजन भी नाराज हो गए और जिला शिक्षा अधिकारी के साथ विवाद की स्थिति निर्मित हो गई।

बच्चों के पालकों ने बताया कि बेसुली एजुकेशन हब कन्या परिसर में पहले ही व्यवस्था की कमी है। इसके बावजूद गढ़िया एकलव्य परिसर के बच्चों को यहां स्थानांतरित कर दिया है। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, साथ ही प्रशासन ने उचित व्यवस्था भी नहीं की है। पालकों ने कहा कि अगर यहां से एकलव्य परिसर के बच्चों को नहीं हटाया जाता है, तो वह अपने बच्चों का टीसी कटवाने को मजबूर होंगे। साथ ही रायपुर पहुंचकर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से इसकी शिकायत करेंगे।

दरअसल गढ़िया में मौजूद एकलव्य विद्यालय के बच्चों को नए भवन का काम अधूरा होने की वजह से बेसुली एजूकेशन हब में कक्षा और छात्रावास की व्यवस्था कर दी गयी है। लेकिन बेसुली कन्या परिसर की छात्राओं और पालकों का कहना है कि, उनकी पढ़ाई और रहने की व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। मामला बढ़ता देख बीईओ, डीईओ और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, अधिकारियों ने बच्चों और पालकों से बातचीत कर स्थिति को समझाने की कोशिश की। इधर कन्या परिसर में मौजूद करीब 150 से 200 बच्चे इस पूरे विवाद से प्रभावित हैं। प्रशासन के उचित व्यवस्था की कमी के बीच बच्चे भावुक हैं और रो रहे हैं, साथ ही अपने भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन के फैसले पर है कि, आखिर बच्चों के हित में क्या रास्ता निकाला जा सकता है।

जिला शिक्षा अधिकारी बलीराम बघेल का कहना है कि पालकों की भावना है कि उनके बच्चों को किसी भी प्रकार की तकलीफ न हो, उनकी बातों को भी सुना जाएगा और पूरी वस्तुस्थिति से बस्तर कलेक्टर को अवगत कराया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे