शरद पूर्णिमा: मंदिर में दर्शन पूजन के लिए जुटे श्रद्धालु
धमतरी, 25 अक्टूबर (हि.स.)। शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार 25 अक्टूबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर नगर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी शीतल चांदनी को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है।
इसी आस्था के चलते श्रद्धालु रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखा गया। आज इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ हुई। शरद पूर्णिमा पर चांदनी में खीर रखने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चंद्रमा की शीतल किरणों के संपर्क में रखी खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों और श्रद्धालुओं के बीच खीर का प्रसाद वितरित किया जाता है।
विप्र विद्वत परिषद धमतरी के मीडिया सलाहकार पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे आरोग्य और समृद्धि से जुड़ा पर्व भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत वर्षा होने की मान्यता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार चंद्रमा की किरणों से युक्त खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के चलते लोग अपने घरों की छतों और आंगन में खीर रखते हैं तथा बाद में परिवार और परिचितों के बीच प्रसाद वितरित करते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

