home page

जीवन में लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें, सोशल मीडिया काे बाधा नहीं, सहयोगी बनाएं : दीपिका सोरी

 | 
जीवन में लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें, सोशल मीडिया काे बाधा नहीं, सहयोगी बनाएं : दीपिका सोरी


सुकमा, 05 सितंबर (हि.स.)। जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को शिक्षकाें का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए शिक्षकों के योगदान और उनकी भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में दीपिका सोरी, कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य तय करना और उसकी दिशा में लगातार आगे बढ़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे तय करें कि उन्हें भविष्य में क्या बनना है और उसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करें। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उपयोग ज्ञान हासिल करने और पढ़ाई के लिए किया जाना चाहिए। उन्हाेने कहा कि यूट़यूब और गूगल जैसे माध्यम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं, बशर्ते उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह समझना जरूरी है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं या सोशल मीडिया उनका समय उपयोग कर रहा है। सोशल मीडिया लक्ष्य की राह में बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी बनना चाहिए।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि शिक्षक होना केवल एक पद नहीं, बल्कि एक मिशन है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद डॉ. कलाम चाहते थे, कि उन्हें एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, सोच विकसित करते हैं और उनके भविष्य की नींव तैयार करते हैं। उन्हाेने बस्तर के कठिन और संवेदनशील क्षेत्रों में विपरीत परिस्थितियों के बीच शिक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा सहित बस्तर क्षेत्र ने लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती झेली है। इसके बावजूद शिक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का काम जारी रखा। उन्होंने कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को नमन किया।

सुकमा पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ना-लिखना नहीं सिखाते, बल्कि विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच अंतर समझाते हैं। वे सोच विकसित करते हैं और व्यक्तित्व निर्माण के साथ भविष्य की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ले, उसकी सफलता के पीछे कहीं न कहीं उसके शिक्षक का योगदान जरूर होता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे