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व्यापमं के प्रश्नपत्र में लोकोक्ति पर सेन समाज की आपत्ति

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व्यापमं के प्रश्नपत्र में लोकोक्ति पर सेन समाज की आपत्ति


धमतरी, 22 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ व्यापमं की ओर से 20 सितंबर को आयोजित लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में सेन समाज की पारंपरिक पहचान से जुड़ी लोकोक्ति को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर समाज ने आपत्ति जताई है। सर्व सेन समाज जिला धमतरी के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर इंदिरा सिंह को ज्ञापन सौंपा। जिसमें छह सूत्री मांगों के साथ मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

सर्व सेन समाज के जिलाध्यक्ष धनसिंह सेन, संरक्षक मोहित सेन एवं सचिव भगवानी राम शांडिल्य ने बताया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र में शामिल विकल्प से समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि भाषा संबंधी प्रश्न में अन्य लोकोक्तियों का चयन किया जा सकता था। किसी विशेष समाज की पारंपरिक पहचान से जुड़ी अभिव्यक्ति को शामिल करने से पहले उसके सामाजिक प्रभाव पर विचार किया जाना चाहिए था। व्यापम जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा संस्थान में प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षण और अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया के बाद ही प्रश्नपत्र परीक्षा में वितरित होता है। ऐसे में संबंधित प्रक्रिया की जिम्मेदारी और निगरानी पर भी सवाल उठते हैं। प्रश्नपत्र में शामिल विकल्प की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने और व्यापम से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कराने की मांग की गई। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के हित में सुधारात्मक निर्णय, भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं समाज की गरिमा और भावनाओं की रक्षा के लिए शासन स्तर पर उचित कार्रवाई की मांग रखी गई। इस दौरान रामगोपाल सेन, कमल नारायण शांडिल्य, बसंत सेन, गोलू सेन, डेरहा राम सेन सहित समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

नाई शब्द के प्रयोग की मांग

ज्ञापन में सेन समाज ने पूर्व में उठी आपत्तियों का भी जिक्र किया है। समाज के अनुसार पहले ऐसे मामलों में नाउ शब्द को विलोपित कर जाति-संबोधन के लिए नाई शब्द के प्रयोग की बात सामने आई थी। इसी बात को आधार बनाते हुए समाज ने वर्तमान मामले में भी शासन से संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की मांग की है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा