निर्बाध बिजली आपूर्ति की गारंटी नहीं कई कारणों से होती है बिजली गुल, रखें धैर्य
-भीषण गर्मी में पावर हब कोरबा बेहाल, बार-बार बिजली कटौती से लोग परेशान
काेरबा 23 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला में भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। 44 डिग्री तापमान में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दिन और रात किसी भी समय बिजली गुल होने से उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 406 करोड़ का बकाया वसूलने के अभियान के बीच बिजली का बार-बार जाना और लो वोल्टेज सहित कई समस्याएं लोगों को मुश्किल में डाल रही है। बिजली कंपनी का तर्क है कि कई कारणों से बिजली गुल होती है ऐसे में हाय तौबा मचाने के बजाय धैर्य धारण करें।
छत्तीसगढ़ के कोरबा को पावर हब के रूप में पहचान मिली है। यहां 1346 मेगावाट की हसदेव ताप विद्युत परियोजना कोरबा वेस्ट, 500 मेगावाट के डीएसपीएम कोरबा ईस्ट, 120 मेगावाट की मिनीमाता जल विद्युत परियोजना माचाडोली के अलावा एचटीपीएस वेस्ट में ही सीमित क्षमता वाला हाइड्रल प्लांट संचालित है। इसके अतिरिक्त 2600 मेगावाट क्षमता की एनटीपीसी कोरबा परियोजना, 1200 मेगावाट की बालको विद्युत परियोजना, इतनी ही क्षमता वाली अडाणी पावर और सैकड़ों मेगावाट बिजली उत्पन्न करने वाली निजी क्षेत्र की परियोजनाएं चल रही है। इससे लोगों को यह विश्वास होना लाजिमी है कि जिस कोरबा में कई हजार मेगावाट बिजली उत्पादित होती है वहां बिजली आपूर्ति का मामला एकदम ठीक होगा, लेकिन ऐसा है नहीं। गर्मी के मौसम में राजधानी रायपुर से लेकर दूसरे क्षेत्रों में जिस प्रकार से पावर कट और लाइन ट्रिप होने समेत कई प्रकार के मसलों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, वैसा कुछ यहां तो नहीं है लेकिन आपूर्ति का बुरा हाल है। दिन हो या रात किसी भी बिजली जा सकती है, कितने भी समय के लिए। मतलब यह है कि लोगों को चैन नहीं मिलना है दिन या रात में। सामान्य समझ यही है कि बिजली कंपनी मनमाने तरीके से पावर कट करने में आमादा है और लोगों की मुश्किलें बढ़ाने में लगी है। इन सबसे अलग तथ्य यह भी है कि अप्रैल महीने में ही 250 से ज्यादा बार बिजली कट के मामले सामने आए और इसने रिकार्ड बनाया।उपभोक्ताओं को सतत बिजली आपूर्ति करने को प्राथमिता बताने का काम वितरण कंपनी लगातार कर रही है। लगातार इस प्रकार के दावे सुशासन शिविर के साथ-साथ अन्य मंचों से हो रहे हैं। दूसरी ओर हालात न तो अधिकारियों से छिपे हैं, न जनप्रतिनिधियों से और न उपभोक्ताओं से। कुल मिलाकर समस्याएं हैं-शहर से लेकर पूरे इलाके में। इन सबके बीच जनता का सवाल है कि क्या भीषण गर्मी के दौर में पावर कट की समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं है। इसलिए समस्या होने पर लोग स्वाभाविक रूप से वितरण कंपनी के फ्यूज कॉल सेंटर से लेकर अधिकारियों को फोन खटखटाते हैं। यह सिलसिला दिन से शुरू होकर देर रात तक चलता है। जनता को मालूम है कि इतना सबकुछ होने पर समस्या हल होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं। अब तो सीएसईबी ने खुद इस बारे में जनजागरूकता पैदा करने के लिए कोशिश शुरू की है। इसके जरिए कहा गया है कि बिजली बाधित होने पर उपभोक्ता धैर्य बनाए रखें और सहयोग करें। उपभोक्ताओं को समझना होगा कि बार-बार फोन करने से समस्या जल्द हल नहीं होती बल्कि कर्मचारियों के कामकाज में बाधा आती है। हालांकि कंपनी ने 1912 के साथ-साथ फ्यूज कॉल सेंटर 9893594125 और 7587298684 नंबर जारी किए हैं। कहा गया है कि यहां पर संपर्क कर वे शिकायत कर सकते हैं। आर के सोनकर अधीक्षण अभियंता का कहना है कि आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में मेंटेनेंस के दौरान कर्मियों की एकाग्रता का होना जरूरी है। यहां-वहां से लाइन में फॉल्ट आने पर मेनपावर को उसकी तलाश करने में काफी समय जाया होता है और फिर कामकाज शुरू करना होता है। ऐसे में बार-बार फोन कॉल आने और उसे इंटरटेंट करने का मतलब ध्यान भंग होना है। संभव है कि ऐसे में अनहोनी हो जाए। लोगों को भरोसा करना होगा कि जोखिम भरी स्थिति में मैदानी अमला काम करता है इसलिए धैर्य जरूरी है। बिजली वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं को अवगत कराया कि लाइन में तकनीकी फॉल्ट होने पर समस्या होती है। इसके अलावा ट्रांसफार्मर में खराबी होने से भी आपूर्ति पर दुष्प्रभाव पड़ता है। रखरखाव कार्य चलने पर भी आपूर्ति बंद की जाती है और खराब मौसम जैसे कि आंधी और बारिश की स्थिति में भी सुरक्षा कारणों से आपूर्ति को ऑफ करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त तेज धूप और उच्च तापमान, बिजली की अधिक खपत, उपकरणों पर अधिक लोड पडऩे से भी आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं होती है। ट्रांसफार्मर के ओवरहिट होने तथा घरेलू व औद्योगिक उपयोग में वृद्धि को भी आपूर्ति में फॉल्ट आने को बड़ा कारण माना जाता है। इसकी जानकारी भी उपभोक्ताओं को लगातार दी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

