कोरबा की मानकी पाटले बनीं आत्मनिर्भर, अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना से मिली आर्थिक मजबूती
कोरबा, 17 जुलाई (हि. स.)। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण कोरबा जिले के ग्राम भुलसीडीह, तहसील भैंसमा निवासी श्रीमती मानकी पाटले हैं, जिन्होंने अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत मिली आर्थिक सहायता से अपने व्यवसाय को नई पहचान दिलाई। आज वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
मानकी पाटले ने बताया कि, पहले सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार का भरण-पोषण करना काफी कठिन था। व्यवसाय का विस्तार करने की इच्छा होने के बावजूद पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें स्थानीय समाचार पत्र के माध्यम से जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति, कोरबा द्वारा संचालित अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) की जानकारी मिली।
योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति, कोरबा में आवेदन किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाराष्ट्र स्टेट बैंक के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इस वित्तीय सहायता में 50 हजार रुपये का अनुदान जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति की ओर से दिया गया, जबकि 20 हजार रुपये की मार्जिन मनी सहायता भी उपलब्ध कराई गई। इससे उन्हें व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आर्थिक संबल मिला।
योजना से प्राप्त राशि का उपयोग कर मानकी पाटले ने अपने व्यवसाय को सुदृढ़ किया। वर्तमान में उनका कारोबार पहले की तुलना में बेहतर तरीके से संचालित हो रहा है और परिवार की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वे नियमित रूप से बैंक की ऋण किस्तों का भुगतान भी कर रही हैं, जो उनकी आर्थिक जिम्मेदारी और सफलता को दर्शाता है।
मानकी पाटले का कहना है कि, यदि उन्हें शासन की इस योजना का लाभ नहीं मिलता, तो व्यवसाय का विस्तार कर पाना संभव नहीं था। आज वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। उनकी सफलता से आसपास की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार, अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना व्यवसाय स्थापित कर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। मानकी पाटले की सफलता इस योजना की प्रभावशीलता का सशक्त उदाहरण है और यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर आर्थिक सशक्तिकरण का सपना साकार किया जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

