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नक्सली हमले में बलिदानी जवानों की तस्वीरों में क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी

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नक्सली हमले में बलिदानी जवानों की तस्वीरों में क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी


जगदलपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। देश में पहली बार नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बलीदान हुए जवानों की जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा रहा है। बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे इलाकों में बलिदानी जवानों की तस्वीरों के साथ क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। इन्हें स्कैन करने पर आम नागरिक मोबाइल पर संबंधित जवान के बलिदान की पूरी जानकारी देख सकेंगे। इसके साथ ही जिन स्थानों पर जवानों ने शहादत दी, वहां की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार काे कहा कि बस्तर संभाग के नक्सलमुक्त इलाकों से तिरंगा लेकर निकले बाइकर्स 3 दिन का सफर पूरा कर गुट्टा पहुंचेंगे। जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे, बलिदानियाें का स्मारक बनाएं जायेंगे। उन्हाेंने कहा कि बस्तर संभाग में वर्ष 2000 से 2026 तक लगभग 1280 जवानों की शहादत हुई है, यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। इस संख्या के पीछे 1280 परिवारों की अपनी-अपनी कहानी है। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने पति, किसी ने पिता। इन जवानों ने ऐसे समय में ड्यूटी की, जब बस्तर के कई इलाके नक्सलियों के प्रभाव वाले माने जाते थे। अब कोशिश है कि इन शहादतों को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रखा जाए। हर शहीद की कहानी लोगों तक पहुंचे, यही इस डिजिटल पहल का उद्देश्य है।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिला का वही इलाके हैं, जिन्हें कभी देश के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था। इन इलाकों में नक्सलियों के बड़े हमले हुए, परिणाम स्वरूप पूरे संभाग में सन 2000 से 2026 तक लगभग 1280 जवानों ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया। लंबे समय तक यहां सुरक्षा बलों के लिए ऑपरेशन चलाना बड़ी चुनौती रहा, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। इन्हीं इलाकों से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। खास बात यह है कि यह यात्रा सिर्फ मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों तक पहुंच रही है, जहां कभी नक्सलियों का प्रभाव था और जहां सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़े हमले हुए थे। तिरंगा यात्रा के दौरान बलीदानी स्थलों पर पहुंचकर जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। इन जगहों की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है। इसका उद्देश्य उन स्थानों को याद रखना है, जहां देश की सुरक्षा के लिए जवानों ने अपनी जान दी।

बस्तर के ताड़मेटला, रानी बोदली, मिपना, बुरकापाल जैसे बड़े हमलों में बड़ी संख्या में जवान बलिदान हुए हैं। दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिले में ज्यादा शहादतें हुई हैं। इन घटनाओं के बाद जिन इलाकों को कभी नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता था, वहां अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। अब उन्हीं क्षेत्रों से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। इस पहल के जरिए उन जगहों को भी तिरंगा यात्रा से जोड़ा जा रहा है, जहां जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान दी। कोई युवा शहीद स्मारक पर पहुंचता है और जवान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जानता, तो वह मोबाइल कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर सकेगा। कुछ ही सेकंड में बलीदानी जवान की तस्वीर, नाम और उससे जुड़ी पूरी जानकारी मोबाइल पर सामने आ जाएगी, जिससे यह जान सकेगा कि किस घटना में शहादत दी और बस्तर की शांति के लिए उसका क्या योगदान रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे