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रामेश्वरम का प्रतीक माना जाता है रुद्रेश्वर धाम, त्रेतायुग से जुड़ी आस्था आज भी खींच रही लाखों श्रद्धालु

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रामेश्वरम का प्रतीक माना जाता है रुद्रेश्वर धाम, त्रेतायुग से जुड़ी आस्था आज भी खींच रही लाखों श्रद्धालु


रामेश्वरम का प्रतीक माना जाता है रुद्रेश्वर धाम, त्रेतायुग से जुड़ी आस्था आज भी खींच रही लाखों श्रद्धालु


धमतरी, 30 जुलाई (हि.स.)। महानदी के पावन तट पर स्थित रुद्री का प्राचीन रुद्रेश्वर धाम छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव तीर्थों में शामिल है। जनश्रुतियों, धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित इस स्वयंभू शिवलिंग का संबंध सीधे त्रेतायुग और भगवान श्रीराम के वनवास काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण इस स्थल पर पहुंचे थे और स्वयंभू रुद्रेश्वर शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आगे की यात्रा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी कारण रुद्रेश्वर धाम को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम की तर्ज पर विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

शिवपुराण की रुद्र संहिता तथा स्कंद पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में इस पवित्र शिवालय का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का लंबा समय धमतरी अंचल के वन क्षेत्रों में व्यतीत किया था और राम वनगमन मार्ग का यह स्थल आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

मंदिर के पुजारी अंकित दुबे और ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि रुद्रेश्वर धाम की विशेषता इसकी स्वयंभू शिवलिंग, प्राचीनता और भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। श्रद्धालुओं का भी विश्वास है कि इस पावन धाम में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलित होती है तथा यहां दर्शन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। यही कारण है कि वर्षभर देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का यहां लगातार आगमन होता रहता है। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण के कारण रुद्रेश्वर धाम आज छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के रूप में स्थापित हो चुका है तथा सावन मास में इसकी दिव्यता और भी अधिक निखरकर सामने आती है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा