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उदंती अभयारण्य में दिखा दुर्लभ हार्नबिल

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उदंती अभयारण्य में दिखा दुर्लभ हार्नबिल


धमतरी, 17 जून (हि.स.)। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने वनों में एक बार फिर जैव विविधता की समृद्ध तस्वीर सामने आई है। अभ्यारण्य क्षेत्र में दुर्लभ एवं आकर्षक उष्णकटिबंधीय पक्षी हार्नबिल (धनेश) के दिखाई देने से वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। अपनी विशाल रंगीन चोंच और सिर पर हेलमेटनुमा संरचना (कैस्क) के कारण पहचान रखने वाला यह पक्षी जंगलों के संरक्षण और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इसे ‘जंगल का किसान’ भी कहा जाता है।

जानकारी के अनुसार, हार्नबिल को बुधवार, 17 जून को उदंती अभयारण्य के बंजारीबाहरा बीट क्षेत्र में देखा गया। यह पक्षी सामान्यतः एशिया और अफ्रीका के घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाया जाता है तथा इसकी उपस्थिति किसी भी वन क्षेत्र की समृद्ध पारिस्थितिकी का संकेत मानी जाती है। हार्नबिल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबी और आकर्षक चोंच है। यह मुख्य रूप से बड़े फलों का सेवन करता है और उनके बीजों को दूर-दराज के क्षेत्रों में फैलाता है। बीजों के प्रसार के माध्यम से नए पौधों और वृक्षों के उगने में मदद मिलती है, जिसके कारण इसे जंगल के प्राकृतिक विस्तार का प्रमुख सहयोगी माना जाता है। यही वजह है कि वन विशेषज्ञ इसे प्रेम से ‘जंगल का किसान’ कहते हैं। यह पक्षी अपने पारिवारिक व्यवहार के लिए भी जाना जाता है। प्रजनन काल में मादा हार्नबिल पेड़ों के खोखले तनों में अंडे देकर स्वयं को सुरक्षित कर लेती है, जबकि नर पक्षी बाहर रहकर भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है। उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड में हार्नबिल को पवित्र पक्षी का दर्जा प्राप्त है और उसके सम्मान में प्रतिवर्ष प्रसिद्ध हार्नबिल महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन ने बताया कि बंजारीबाहरा बीट में इस दुर्लभ पक्षी का अवलोकन किया गया है। उन्होंने कहा कि हार्नबिल का दिखाई देना क्षेत्र के स्वस्थ वन पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का सकारात्मक संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी उदंती-सीतानदी के जंगलों को प्रकृति प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बनाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा