रंजीता की मुहिम ने बदली पढ़ाई की तस्वीर, 167 स्कूलों में बांटे स्मार्ट टीवी
हजारों बच्चों तक पहुंची मदद, शिक्षा के साथ पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों को भी बनाया अभियान का हिस्सा
धमतरी, 04 सितंबर (हि.स.)। एक स्कूल से शुरू हुई छोटी-सी पहल आज 167 विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। वेतन का आधा हिस्सा शिक्षा और समाजसेवा के लिए समर्पित करने वाली शिक्षिका रंजीता तुमनचंद साहू ने आधुनिक तकनीक को शिक्षा से जोड़कर दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के हजारों बच्चों के लिए सीखने के नए अवसर तैयार किए हैं।
स्मार्ट टीवी, शैक्षणिक सामग्री, पौधरोपण और जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद जैसे उनके प्रयासों ने शिक्षा को किताबों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज और पर्यावरण से जोड़ने का काम किया है। उनके इसी उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025-26 के लिए चयन हुआ है। पांच सितंबर को राजभवन में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। मगरलोड विकासखंड के संकुल करेली छोटी अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला लुगे में वर्ष 2009 से सेवाएं दे रहीं रंजीता साहू ने वर्ष 2022 में मिले ज्ञानदीप पुरस्कार की राशि से अपने स्कूल में पहला स्मार्ट टीवी लगवाया। इसके बाद उन्होंने इसे एक अभियान का रूप देते हुए अन्य स्कूलों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। आज 167 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी लगाए जा चुके हैं, जिनमें 100 से अधिक आदिवासी और वनांचल क्षेत्र के स्कूल शामिल हैं। खास बात यह है कि इस पहल को जनसहभागिता से जोड़ा गया है। प्रत्येक स्मार्ट टीवी की लागत में 50 प्रतिशत राशि रंजीता स्वयं वहन करती हैं, जबकि शेष राशि अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय के सहयोग से जुटाई जाती है। उनका उद्देश्य है कि शहरों की तरह दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हों और वे तकनीक के माध्यम से बेहतर ढंग से सीख सकें।
शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश: रंजीता ने अपने शैक्षणिक प्रयासों को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा है। ‘प्रकृति हमारा सबसे बड़ा गुरु’ और ‘पेड़ लगाबो तभे तो फल खाबो’ अभियान के तहत विद्यार्थियों को 3000 चंदन के पौधे वितरित किए। इसके अलावा 1100 पपीते के पौधे और 10 हजार काली हल्दी के औषधीय पौधे भी निशुल्क बांटे। उन्होंने अपने खेत में 1100 से अधिक फलदार पेड़ लगाए और करीब 25 हजार किलो अमरूद विद्यार्थियों तथा ग्रामीणों को वितरित किए। शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में भी उनका प्रयास व्यापक रहा है। 300 से अधिक विद्यालयों में गणित, हिंदी वर्णमाला और नैतिक मूल्यों पर आधारित चार्ट वितरित किए गए, वहीं जिले के करीब 1500 विद्यालयों तक वर्णमाला आधारित चार्ट पहुंचाए गए।
11 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पेन तथा जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई। पिछले 11 वर्षों में करीब 1100 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान के तहत 10 हजार से अधिक बच्चों को गुल्लक बांटकर बचत की आदत और आर्थिक अनुशासन का संदेश भी दिया गया। “शिक्षा समाज को बदलने की सबसे बड़ी ताकत” रंजीता साहू का कहना है कि राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होना उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है। इस उपलब्धि में पति तुमनचंद साहू की प्रेरणा, मार्गदर्शन, सहयोग और प्रोत्साहन का विशेष योगदान रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि समाज को बेहतर दिशा देना भी है। सच्ची शिक्षा वही है, जो समाज को संवारने का रास्ता दिखाए। शिक्षा में किए गए नवाचारी प्रयास बच्चों में जीवन मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता की समझ विकसित करने का माध्यम बनें, यही उनका प्रयास है। रंजीता के लिए शिक्षक होना केवल कक्षा तक सीमित जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बनाने का संकल्प है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

