कोरबा में विकास की नई राह: जामभाठा–सोनारी तक पहुँची पक्की सड़क
कोरबा, 04 मई (हि. स.)। दूरस्थ पहाड़ी और वन क्षेत्रों में बसे गांवों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा होती है। कोरबा विकासखंड के जामभाठा, सोनारी और आसपास के टोला-पारा में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए अब यही जीवनरेखा हकीकत बन चुकी है।
वर्षों तक ये गांव पक्की सड़क से वंचित रहे। ग्रामीणों को पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर आवागमन करना पड़ता था। खासकर बारिश के मौसम में हालात और बदतर हो जाते थे—कीचड़ और फिसलन भरे रास्तों के कारण गांव लगभग बाहरी दुनिया से कट जाता था। बीमारों को अस्पताल ले जाना, बच्चों की पढ़ाई या दैनिक जरूरतों के लिए राशन लाना—हर काम संघर्ष से भरा हुआ था।
स्थिति में बदलाव तब आया जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना शुरू की गई। इसके तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशन में जामभाठा-सोनारी तक पक्की सड़क निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ। लगभग 3.60 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण पहाड़ी और कठिन भू-भाग में किया गया, जो अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।
सड़क बनने के बाद ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव साफ नजर आ रहा है। अब वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं और आपात स्थिति में एम्बुलेंस सेवा भी सुलभ हो गई है। ग्रामीण पन साय बताते हैं कि पहले बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना बेहद कठिन था, लेकिन अब यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है।
वहीं, ग्रामीण कुमारी बाई के अनुसार, सड़क बनने से गांव के लोग अब मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। शिक्षकों का स्कूल तक पहुंचना आसान हुआ है और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं हो रही। इसके साथ ही ग्रामीणों को अब राशन और अन्य आवश्यक सामग्री लाने में भी आसानी हो रही है।
हाल ही में कलेक्टर कुणाल ने भी गांव पहुंचकर सड़क का निरीक्षण किया, जिससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।जामभाठा और सोनारी की यह कहानी सिर्फ एक सड़क निर्माण की नहीं, बल्कि विकास और उम्मीद की नई शुरुआत की कहानी है। यह सड़क अब इन गांवों के लिए बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और सुविधाओं तक पहुंच का माध्यम बन गई है, जिससे उनका जीवन धीरे-धीरे बदल रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

