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आदिवासी सेवा केंद्रों में 13 से 15 अगस्त तक जनसुनवाई

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421 जनजातीय बहुल ग्रामों में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर होगा समाधान

बलरामपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। बलरामपुर जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शासन की योजनाओं एवं सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने के उद्देश्य से 13 से 15 अगस्त तक सभी आदिवासी सेवा केंद्रों में जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित आदि कर्मचारी अभियान के तहत आयोजित होने वाले इन शिविरों में ग्रामीणों की समस्याओं एवं शिकायतों का स्थानीय स्तर पर निराकरण करने के साथ पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

जिले के छह विकासखंडों के 421 जनजातीय बहुल ग्रामों में संचालित इस अभियान का उद्देश्य शासन की योजनाओं एवं सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाना है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण अपनी समस्याएं एवं शिकायतें संबंधित अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे। साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं एवं शासकीय सेवाओं की जानकारी देकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

आदिवासी सेवा केंद्रों को जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने वाले महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, शिकायत निवारण और विभिन्न विभागों की सेवाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

अभियान में आदि कर्मचारी वॉलिंटियर्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को जागरूक करने, नागरिक सुविधाओं की जानकारी देने, शिकायतों के निराकरण में सहयोग करने, डिजिटल दस्तावेजीकरण तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से पात्र लोगों को जोड़ने में सहायता करेंगे।

जनसुनवाई शिविरों में आदिम जाति विकास विभाग के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित बैंकिंग एवं सीएससी से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहेंगे। संबंधित विभागों द्वारा अपनी-अपनी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी और पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिविरों के दौरान ग्रामीणों की शिकायतों एवं समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर उनके निराकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इससे जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूर स्थित जिला अथवा विकासखंड कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही शासकीय सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय