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नक्सलवद की समाप्ति के बाद पहली विजयादशमी पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का हुआ आयोजन

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नक्सलवद की समाप्ति के बाद पहली विजयादशमी पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का हुआ आयोजन


जगदलपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवाद के खिलाफ मिली सफलता के बाद इस बार विजयदशमी का पर्व पुलिस के लिए खास रहा। नक्सल मुक्ति के बाद पहली विजयादशमी के अवसर पर आज मंगलवार काे बस्तर संभाग मुख्यालय के पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ।

इस दौरान पुलिस के प्रमुख हथियारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजा में बस्तर आईजी बद्रीनाथ मीणा, एसपी सलभ सिन्हा सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, थाना प्रभारी एवं डीआरजी के जवान शामिल हुए।

इसके साथ ही नक्सल मोर्चे पर तैनात रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस जवानों और अधिकारियों को बधाई दी गई। वहीं नक्सल हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया। पूजा अर्चना के बाद पुलिस के अधिकारियों ने हवा में फायरिंग भी की गई। इन हथियारों में एलएमजी, एके-47, इंसास, एसएलआर, मोर्टार, ग्रेनेड लॉन्चर सहित अन्य प्रमुख हथियार शामिल थे। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की यह परंपरा पुलिस बल के लिए अपने कर्तव्य, साहस और जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जाती है।

बस्तर एसपी शलभ सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और लगातार चलाए गए अभियानों के चलते बस्तर अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। ऐसे में इस बार पुलिस के साथ-साथ बस्तर की जनता भी विजयादशमी का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मना रही है। नक्सल विरोधी अभियानों में इस्तेमाल किए गए अत्याधुनिक हथियारों और अन्य संसाधनों की पूजा की गई। इस दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों ने बस्तर में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने का संकल्प भी लिया।

एसपी ने कहा कि इस पूजा विधान में पुलिस लाइन में मौजूद सभी प्रमुख शस्त्रों को बाहर निकाल गया और विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई। उन्हाेने कहा कि ये वही शस्त्र हैं जिनकी बदौलत बस्तर शांति की राह में आगे बढ़ा है, और नक्सल मोर्चे पर सफलता हासिल की है। ये हथियार पुलिस लाइन में मौजूद रहते हैं, और जब कभी भी इनकी आवश्यकता पड़ती है, इसका इस्तेमाल किया जाता है। साल भर इन हथियारों की देखरेख, रखरखाव किया जाता है, साल में एक बार इनकी पूजा अर्चना भी की जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे