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कीट प्रकोप से धान की फसल प्रभावित, किसान परेशान

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कीट प्रकोप से धान की फसल प्रभावित, किसान परेशान


कीट प्रकोप से धान की फसल प्रभावित, किसान परेशान


कीट प्रकोप से धान की फसल प्रभावित, किसान परेशान


कई गांवों में तनाछेदक, पत्ती मोड़क और कई खेत में झुलसा रोग

दवा छिड़काव के बाद भी नहीं मिल रही राहत

धमतरी, 23 सितंबर (हि.स.)। खरीफ सीजन की धान फसल अब पकने की ओर बढ़ रही है, लेकिन मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच फसल में विभिन्न प्रकार की बीमारियों और कीट प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

फसल को बचाने के लिए किसान खेतों में लगातार कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, इसके बावजूद कई जगह बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने धान फसल में विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही दवा छिड़काव करने कहा है।

धमतरी जिले से लगे ग्राम डाही, छाती, सेमरा, सेनचुवा, बिजनापुरी, बोड़रा, कसही, हंकारा, अंगारा, खम्हरिया, जुनवानी, डोमा, गुजरा, कोसमर्रा, भखारा, बिरेतरा, धौराभाठा, रावनगुड़ा, लिमतरा, सम्बलपुर, सांकरा, भोथली, पीपरछेड़ी, गागरा, कंडेल, पुरी, गोपालपुरी, कांशिपुरी और सरसोंपुरी सहित कई गांवों में धान की फसल पर इसका असर देखा जा रहा है।

ग्राम सेवक चित्रसेन साहू एवं कृषक मित्र खिलेद्र सिन्हा के अनुसार मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण फसल में बीमारियां बढ़ रही हैं। ग्राम बिजनापुरी के किसान बुधारु निषाद, बोड़रा के रामप्रसाद साहू व हरेन्द्र साहू, कसही के गोपाल ठाकुर, अरमान खान व देवनंदन पटेल, हंकारा के महेंद्र साहू व गोरक साहू, अंगारा के सरजू साहू व जनक साहू तथा डाही भगोली पटेल, थानू साहू, डामन सिन्हा, नूतन देवांगन और ओंकार पटेल सहित किसानों ने बताया कि वे कई बार दवा का छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन फसल की बीमारी नियंत्रित नहीं हो रही है।

सही दवा का चयन नहीं करने से किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाने के साथ फसल खराब होने का नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। किसानों ने कृषि विभाग से क्षेत्र में कीटनाशक दुकानों की जांच करने, दवाओं की गुणवत्ता और संचालन की वैधता की निगरानी करने तथा फसल में फैल रही बीमारियों के नियंत्रण के लिए उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की मांग की है।

किसानों ने कहा: उत्पादन हाेगा प्रभावित:

ग्राम पंचायत देमार के किसान दिनेश कुमार साहू संतोष कुमार सिन्हा, गोपालपुरी गोस्वामी, किसान धरम सिंह मरकाम ने कहा कि खेतों में तनाछेदक, पत्ती मोड़क और शीथ ब्लास्ट जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई बार कीटनाशक का छिड़काव करने के बाद भी फसल में लालिमा और पीलापन बना हुआ है, जिससे पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है। किसान उमेश साहू ने कहा कि आगामी माह दशहरा पर्व के बाद धान की कटाई शुरू होने की संभावना है। हरूना धान की फसल में बालियां निकल चुकी हैं और अब फसल पकने की तैयारी में है। ऐसे समय में बीमारी और कीट प्रकोप से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। डोंड़की के किसान राजीव सिन्हा ने कहा कि खेत में तैयार हो रही फसल में कीट व्याधि से उत्पादन प्रभावित होगा। मालूम हो कि धमतरी जिले में एक लाख 32 हजार हेक्टेयर में धान फसल की खेती ली जा रही है।

फसल को नुकसान से बचाने के लिए ये उपाय करें किसान: डाॅ. शक्ति वर्मा

कृषि विज्ञान केंद्र संबलपुर के कीट वैज्ञानिक डाॅ. शक्ति वर्मा ने कहा कि धान की फसल में इन दिनों तनाछेदक, पत्ती मोड़क, पेनिकल माइट, भूरा माहू और ब्लास्ट समेत फफूंदजनित रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, इसलिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। तनाछेदक व पत्ती मोड़क के लिए बाईफेनथ्रीन 10 ईसी 250 मिली या करटाप हाइड्रोक्लोराइड 50 एसपी 200 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव किया जा सकता है। पेनिकल माइट के लिए डायफेथुरोन 50 डब्ल्यूपी 120 ग्राम तथा भूरा माहू के लिए ट्राईफ्लूमैजोपाइरिम 10 एसी 100 मिली प्रति एकड़ की दर बताई गई है। ब्लास्ट, गलन व अन्य फफूंद रोगों के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी 200 मिली प्रति एकड़ या अजोक्सीस्ट्रोबिन प्लस डाइफेनोकोनाजोल तीन मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है। यदि उक्त उपयोग करने के बाद भी राहत नहीं मिले तो कृषि विज्ञान केन्द्र या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सलाह लें।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा