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पटवारियों की हड़ताल से कामकाज ठप हुआ, काेंड़ागांव का नही हुआ बंदोबस्त- मोहन मरकाम

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पटवारियों की हड़ताल से कामकाज ठप हुआ, काेंड़ागांव का नही हुआ बंदोबस्त- मोहन मरकाम


कोंडागांव , 07 नवंबर (हि.स.)। पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और राजस्व कामकाज ठप होने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल इंडिया और सुशासन की बात करती है, लेकिन कोंडागांव में आज भी करीब 100 साल पुराने राजस्व नक्शों के आधार पर जमीन से जुड़े काम हो रहे हैं। सरकार को नया ऐप लागू करने और डिजिटल सर्वे का दबाव बनाने से पहले जमीन के पुराने रिकॉर्ड दुरुस्त करने चाहिए थे।

मोहन मरकाम ने कहा कि राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के पटवारी 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारी पीव्ही एप में तकनीकी और कामकाज से जुड़ी दिक्कतों, वेतन विसंगति और लंबित पदोन्नति समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण डिजिटल क्रॉप सर्वे, किसान पंजीयन, धान पंजीयन, फौती नामांतरण और आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनाने जैसे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। इससे किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरकाम ने कहा कि सरकार को आम जनता की परेशानी को देखते हुए पटवारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मोहन मरकाम ने कोंडागांव की राजस्व व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले में 1924-25 के बाद आज तक नया राजस्व सर्वे और बंदोबस्त नहीं हुआ है। आजादी के बाद भी जिले के गांवों में जमीन से जुड़े काम पुराने नक्शों और रिकॉर्ड के आधार पर ही किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय 10 मार्च 2023 को जिले के सभी गांवों में राजस्व सर्वे कराने के लिए राजपत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद अब तक सिर्फ एक गांव में ही प्रायोगिक तौर पर सर्वे हो पाया है। इसकी आगे की प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हुई है।

मरकाम ने कहा कि कोंडागांव ऐसा जिला है, जहां आजादी के बाद से अब तक बंदोबस्त की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में पुराने जमीन रिकॉर्ड के आधार पर आधुनिक डिजिटल सर्वे कराने से कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। सरकार को पहले जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त करने और राजस्व सर्वे की प्रक्रिया पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे